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कोविड-19: बिहार की सरकारी योजनाएँ कमजोर आबादी की सहायता कितने अच्छे से कर रहीं हैं?

कोविड-19 महामारी और उससे जुड़े लॉकडाउन का तत्काल प्रतिकूल प्रभाव ऐसे प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों पर काफी अधिक देखा गया जिनकी अपने मूल गांवों में सरकारी योजनाओं तक पहुंचने की क्षमता अनिश्चित थी। ...

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जब आपराधिकता अपराध को जन्‍म देती है: निर्वाचित राजनेताओं की भूमिका

राजनीति का अपराधीकरण समाज के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है। यद्यपि साहित्य में आपराधिक रूप से आरोपी नेताओं के आर्थिक परिणामों पर अध्ययन तो किया गया है, लेकिन उनके क्षेत्राधिकार में आपराधिक माहौल पर ...

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ड्यूएट-विकेंद्रीकृत शहरी रोजगार और प्रशिक्षण: संशोधित

सितंबर 2020 में, शहरी रोजगार के लिए ज्यां द्रेज़ का ड्यूएट (विकेंद्रीकृत शहरी रोज़गार एवं प्रशिक्षण) नामक प्रस्ताेव आइडियाज फॉर इंडिया पर प्रस्तु त किया गया था।इसके बाद आयोजित एक गहन परिसंवाद में ख्यात...

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क्या मतदान का अधिकार राजनीतिक व्यवहार को प्रभावित करता है? भारत से ऐतिहासिक साक्ष्य

लोकतंत्र को लंबे समय से बेहतर आर्थिक विकास परिणामों के लिए जाना जाता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि नागरिकों को मतदान का अधिकार देना, राजनीतिक भागीदारी या प्रतियोगिता को प्रभावी बनाए रखने को सुनिश्च...

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भारत में मानसिक स्वास्थ्य असमानताएँ

सामाजिक समूहों के बीच शारीरिक स्वास्थ्य असमानताओं को लेकर अब तक काफी शोध किया जा चुका है, लेकिन इसमें मानसिक स्वास्थ्य का पहलू अब तक अनदेखा है। 2007-2008 में छह भारतीय राज्यों में डब्ल्यूएचओ द्वारा कि...

  • लेख

मानसिक स्वास्थ्य को मापने के लिए फोन सर्वेक्षण का इस्तेमाल

कोविड-19 के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं मानवीय संकटों ने खराब मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को उजागर किया है। शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी काम और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है,...

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भारत में सामाजिक और आर्थिक अनुसंधान के लिए फोन सर्वेक्षण पद्धति

कोविड-19 के प्रसार को रोकने हेतु लगाई गई पाबंदियों और सामाजिक दूरी के दिशानिर्देशों के मद्देनजर फेस-टू-फेस सर्वेक्षणों के माध्यम से डेटा संग्रह करने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इस पोस्ट में ...

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किसानों की आय में सुधार करना: झारखंड में किए गए सर्वेक्षण से सीख

वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के केंद्र सरकार के लक्ष्य की दिशा में कार्य करने के लिए झारखंड राज्य सरकार ने 2017 में जोहार परियोजना आरंभ की। इस लेख में खनूजा एवं अन्‍य ने इस परियोजना के तह...

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क्या किसी सहकर्मी का पुरुष या महिला होना मायने रखता है? कॉल सेंटरों से प्राप्‍त साक्ष्य

कई सिद्धांत यह सुझाव देते हैं कि लिंग-विभेदी समाजों में महिला एवं पुरुष कर्मचारियों के एक साथ काम करने के नकारात्मक परिणाम हो सकते है। पांच भारतीय शहरों में स्थित कॉल सेंटरों में 765 कर्मचारियों के सा...

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ड्यूएट: कमजोर वर्ग के लोगों हेतु एक मजबूत परिवेश का निर्माण

ज्यां ड्रेज के ड्यूएट प्रस्ताव (एक शहरी कार्य कार्यक्रम) पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए गुप्ता एवं अन्य यह तर्क देते हैं कि इसका उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं है, बल्कि एक व्यापक परिवेश का...

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महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण और घरेलू हिंसा

भारत में महिलाओं की सुरक्षा - घरों के अंदर और बाहर - दोनों एक प्रमुख चिंता का विषय है। यह पोस्ट महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, मजबूत विरासत अधिकारों और काम करने की स्थिति तथा घरेलू हिंसा की घटनाओं के बी...

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ड्यूएट: अनौपचारिक श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को शामिल करने हेतु विस्तार करना

ज्यां द्रेज़ के ड्यूएट प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए रक्षिता स्वामी और अमित बसोले ने इसकी सरल डिजाइन को इसकी ताकत के रूप में उजागर किया है और अधिक व्यापक दृष्टिकोण का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में अ...

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महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस

25 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष कोविड-19 महामारी और संबद्ध लॉकडाउन के कारण घरेलू हिंसा में भरी वृद्धि ...

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शिक्षक की जवाबदेही: कक्षा में पढ़ाई संबंधी कार्यों की तुलना में गैर-शैक्षणिक कार्य को प्राथमिकता

यद्यपि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2009) के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं के लिए 200 दिनों का शिक्षण अनिवार्य है लेकिन सरकारी स्कूलों में इसकी वास्तविक संख्या बहुत कम प्रतीत होती है। गुणात्मक फील्डवर्क और राज...

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ड्यूएट: कुछ व्यावहारिक चिंताएं

शहरी रोजगार कार्यक्रम के लिए ज्यां द्रेज़ के ड्यूएट प्रस्ताव पर अपना दृष्टिकोण प्रदान करते हुए अश्विनी कुलकर्णी इसकी कार्यान्वयन प्रक्रिया के बारे में प्रासंगिक सवाल उठाती हैं। वे शहरी परियोजनाओं को पू...

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