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कोविड-19: बिहार की सरकारी योजनाएँ कमजोर आबादी की सहायता कितने अच्छे से कर रहीं हैं?

कोविड-19 महामारी और उससे जुड़े लॉकडाउन का तत्काल प्रतिकूल प्रभाव ऐसे प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों पर काफी अधिक देखा गया जिनकी अपने मूल गांवों में सरकारी योजनाओं तक पहुंचने की क्षमता अनिश्चित थी। ...

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जब आपराधिकता अपराध को जन्‍म देती है: निर्वाचित राजनेताओं की भूमिका

राजनीति का अपराधीकरण समाज के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है। यद्यपि साहित्य में आपराधिक रूप से आरोपी नेताओं के आर्थिक परिणामों पर अध्ययन तो किया गया है, लेकिन उनके क्षेत्राधिकार में आपराधिक माहौल पर ...

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ड्यूएट-विकेंद्रीकृत शहरी रोजगार और प्रशिक्षण: संशोधित

सितंबर 2020 में, शहरी रोजगार के लिए ज्यां द्रेज़ का ड्यूएट (विकेंद्रीकृत शहरी रोज़गार एवं प्रशिक्षण) नामक प्रस्ताेव आइडियाज फॉर इंडिया पर प्रस्तु त किया गया था।इसके बाद आयोजित एक गहन परिसंवाद में ख्यात...

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सास अपनी बहुओं के सामाजिक नेटवर्क तथा प्रजनन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं?

परिवार के सदस्यों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधात्मक सामाजिक मानदंड एवं रणनीतिक बाधाएं, महिलाओं की सामाजिक नेटवर्क तक पहुंच और उससे प्राप्‍त होने वाले लाभ को सीमित कर सकती हैं। ग्रामीण उत्तर प्रदेश में एक स...

  • लेख

क्या भारत में अंग्रेजी बोलना अधिक लाभकारी होता है?

भारत में आम धारणा है कि अंग्रेजी-भाषा कौशल से ही बड़े पैमाने पर आर्थिक प्रतिफल प्राप्‍त होते हैं। इस कॉलम में भारत में अंग्रेजी कौशल से वेतन प्रतिफल का अनुमान लगाया गया है, जिसमे यह पाया गया कि अंग्रे...

  • लेख

शादी के समय महिलाओं की उम्र घरेलू हिंसा को कैसे प्रभावित करती है?

दुनिया भर में तीन में से एक महिला अपने जीवनकाल में घरेलू हिंसा से प्रभावित होती है। जो महिलाएं घरेलू हिंसा का सामना करती हैं, उन्हें गंभीर प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणामों से प्रभावित होने के साथ-साथ भारी ...

  • लेख

भारत में महिलाओं के विरासत के अधिकार और पुत्र की प्राथमिकता

भारत में अस्वाभाविक रूप से पुरुष-पक्षपाती जनसंख्या लिंग-अनुपात का एक महत्वपूर्ण कारण भारतीय माता-पिता की पुत्र होने की महत्वाकांक्षा है। यह लेख इस बात की पड़ताल करता है कि उनकी यह इच्छा किस हद तक उनकी...

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क्या व्यावसाय के लिए जाति की पहचान अभी भी मायने रखती है?

आज के भारत में, केवल जातिगत पहचान की भावना के कारण लोग किस हद तक नौकरियों को नजर अंदाज करते हैं? यह लेख ग्रामीण ओडिशा में किए गए एक प्रयोग पर चर्चा करता है जिसमें अस्थायी काम के इच्छु?क श्रमिकों को एक...

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कार्यरत बैंक ऋण पर विवादों का प्रभाव: भारतीय सीमा क्षेत्रों से साक्ष्य

विवाद, महत्वहपूर्ण व्यक्तियों के निर्णयों के माध्यम से आर्थिक परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इस लेख में भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगातार गोलाबारी की घटनाओं के सीमावर्ती जिलों में कार्यरत ऋण अधिकारियों ...

  • लेख

क्या राजनीतिक आरक्षण कारगर है? यदि हाँ तो किसके लिए?

क्या राजनीतिक आरक्षण विकास को कमजोर करता है या उसे बढ़ावा देता है, तो किसके लिए? यह लेख भारत के 'अनुसूचित क्षेत्रों' का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जहाँ ऐतिहासिक रूप से वंचित अनुसूचित जनजातियों के लिए ...

  • लेख

लोक-स्वास्थ्य कैसे बने राजनीतिक प्राथमिकता

आज सारा विश्व कोरोना महामारी की समस्या से जूझ रहा है जिस पर अनेक कोणों से शोधकर्ताओं ने प्रामाणिक आलेख प्रस्तुत किए हैं। भावेश झा द्वारा इस आलेख में आम जनता के स्वास्थ्य को राजनीतिक प्राथमिकता कैसे प्...

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कोविड-19: बिहार लौटते प्रवासी मजदूर, ग्रामीण आजीविका तथा सामाजिक सुरक्षा

कोविड-19 के प्रसार को कम करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण अनेक प्रवासी मजदूरों ने अपना रोज़गार गँवाया और उनमें से करीब 30 लाख से ज्‍यादा प्रवासी दूसरे राज्यों से बिहार लौटे। इस विषय पर प्रोफेस...

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हमें भारत के बच्चों को निराश नहीं करना है

कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल बंद हैं और पूरी दुनिया में करोड़ों बच्चे घर में बैठे रहने को मजबूर हैं। अनिश्चितता से भरे इस दौर में, खास तौर पर बच्चों को सामान्य हालात की कुछ झलक चाहिए। उनकी ज़रूरतों के...

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भूख और अनिश्चितता: ओडिशा के खानाबदोश भविष्यश-वक्ताजओं की स्थिति

अबिनाश दाश चौधरी, जो भारत में कोविड-19 से जुड़े मानवीय संकट पर पाक्षिक डेटा प्रस्तुत करने के लिए शोधकर्ताओं के एक नेटवर्क के हिस्से के रूप में काम करते हैं, ने इस लेख में दक्षिण ओडिशा के पारंपरिक भविष...

  • लेख

कैंसर जांच के लिए ‘मोबाइल कैंप’ पर पुनर्विचार करना

मोबाइल शिविरों के माध्यम से कैंसर की निवारक जांचों की संख्याप बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी प्रयासों के बावजूद, इस बीमारी के कारण मृत्यु दर अधिक बनी हुई है। इस लेख में घोष एवं सेकर ने बड़ी संख्या में ल...

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