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शहरी अपवर्जन (बहिष्करण): कोविड-19 के मद्देनजर भारत में सामाजिक सुरक्षा पर पुनर्विचार करना

कोविड-19 के शुरुआती दिनों में लॉकडाउन के कारण हुई आर्थिक असुरक्षा के चलते कई परिवार अपनी उपभोग जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के लिए मजबूर हुए। यह लेख दिल्ली एनसी...

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और कोविड-19

2013 में लागू किया गया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में मूलभूत सुधार ले आया और सबसे महत्वपूर्ण इसके जरिये कानूनी रूप से भोजन का अधिकार' दिया गया। यह लेख ब...

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कोविड-19 संकट और खाद्य सुरक्षा

2020 में कोविड -19 के प्रसार को रोकने के लिए भारत में लगाए गए राष्ट्रीय लॉकडाउन ने लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया और जो लोग रोज़गार में बने रहे उनकी कमाई में तेजी से कमी आई। बहु-राज्य सर्वेक्षणों के आ...

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कोविड-19: बिहार की सरकारी योजनाएँ कमजोर आबादी की सहायता कितने अच्छे से कर रहीं हैं?

कोविड-19 महामारी और उससे जुड़े लॉकडाउन का तत्काल प्रतिकूल प्रभाव ऐसे प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों पर काफी अधिक देखा गया जिनकी अपने मूल गांवों में सरकारी योजनाओं तक पहुंचने की क्षमता अनिश्चित थी। ...

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कृषि कानून: सकारात्मक परिणामों के लिए क्षमतावान

सिराज हुसैन का तर्क है कि यद्यपि कृषि कानून भारतीय कृषि के लिए मध्यम-से-लंबी अवधि में लाभकारी हो सकते हैं परंतु यदि उन्‍हें पारित कराने के लिए संसदीय प्रक्रियाओं का पालन किए जाता और आम सहमति बनाने के ...

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कृषि कानून: कायापलट करने वाले बदलाव लाने की संभावना कम है

इस पोस्ट में संजय कौल ने कृषि कानून से सभी हितधारकों (किसानों, व्यवसायियों, कमीशन एजेंटों, और सरकार) को होने वाले लाभों और कमियों पर चर्चा की है। इसमें शामिल गतिशीलता को देखते हुए उन्होने यह निष्कर्ष ...

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जलवायु संबंधी आघातों से निपटने में स्वयं-सहायता समूह परिवारों को कैसे सक्षम बनाते हैं

जलवायु परिवर्तनशीलता और इसकी विनाशक सीमा के साथ-साथ उपयुक्त बीमा उपायों की कमी वर्षा आधारित कृषि और विकासशील देशों में बड़ी आबादी के लिए खतरा पैदा करती है। यह लेख बताता है कि कैसे स्वयं-सहायता समूह (ए...

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कवरेज की समीक्षा

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) काफी चर्चित विषय रहा है। रीतिका खेरा और अनमोल सोमंची ने सरकारी आंकड़ों का प्रयोग कर पीडीएस के राज्य-वार कवरेज का अनुमान लगाया और भोजन ...

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कोविड-19 के प्रति सरकार की प्रतिक्रियाएँ कितनी देाषपूर्ण रही हैं? प्रवासी संकट का आकलन

कोविड-19 संकट के बीच, मार्च के अंत तक, अनगिनत प्रवासी श्रमिकों ने भारत के बंद शहरों से भाग कर अपने-अपने घरों के लिए गांवों की ओर पैदल ही जाना शुरू कर दिया। इस पोस्ट में सरमिष्‍ठा पाल यह तर्क देती हैं ...

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भ्रष्टाचार और बहिष्करण को संतुलित करना: आधार को पीडीएस में शामिल करना

सार्वजनिक रूप से प्रदान की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लाभार्थियों को इन लाभों को प्राप्त करने के लिए अपनी पहचान कैसे साबित करनी चाहिए? यह लेख, झारखंड राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में...

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हमें कोविड-19 से लड़ने के लिए एक मार्शल प्‍लान की आवश्यकता है

कोविड -19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अभी भी बहुत कुछ अज्ञात है, लेकिन दो कड़े सबक स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं: हमें अपनी स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को सुदृढ़ करने तथा सामाजिक-सुरक्षा जाल को मजबूत बनाने...

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कोविड-19: क्या हम लंबी दौड़ के लिए तैयार हैं? - भाग 2

इस आलेख के पहले भाग में, लेखकों ने भारत में कोविड-19 के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया का मार्गदर्शन करने हेतु व्यापक सिफारिशें कीं। इस भाग में, वे पांच ऐसे समूहों की पहचान करते हैं जिनके वर्तमान संकट से ...

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