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ठोस कचरा प्रबंधन संबंधी चुनौतियां: पटना शहर का मामला

अपर्याप्त योजना के साथ तेजी से शहरीकरण ने भारत के कई शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन की समस्याओं को जन्म दिया है। इस नोट में, उमा शरमिष्‍ठा बिहार राज्य के पटना शहर में एक क्षेत्र अध्ययन से प्रारंभिक निष्कर...

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बजट 2021-22: लिंग आधारित नजरिए से

2021-22 के केंद्रीय बजट को लिंग आधारित नजरिए से परखते हुए नलिनी गुलाटी ने इस बात पर चर्चा की है कि इस बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं के लिए विशेष रूप से डिजिटल पुश, सार्वजनिक परिवहन, अन्य सार...

  • दृष्टिकोण

कृषि श्रमिकों का निकास और पराली का जलना

यद्यपि श्रमिकों का कम उत्‍पादकता वाले क्षेत्रों से उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्रों की ओर स्‍थानांतरित होने की प्रक्रिया को आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले ...

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कोयला आधारित बिजली इकाइयों से प्रदूषण और बच्चों एवं महिलाओं की एनीमिक स्थिति

स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव को व्‍यापक रूप से शोध-साहित्य में जगह मिली है। जहां अन्य अध्ययनों में मुख्य रूप से सामान्य रुग्णता और मृत्यु दर जैसे परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, यह लेख ...

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कोविड-19, जनसंख्या और प्रदूषण: भविष्य के लिए एक कार्ययोजना

वर्तमान में चल रही कोविड-19 महामारी के बहुआयामी प्रभाव दिख रहे हैं और इसने हमारे समक्ष दो दीर्घकालिक मुद्दे भी रख दिये हैं। वे हैं - जनसंख्या और प्रदूषण। इस आलेख में ऋषभ महेंद्र एवं श्वेता गुप्ता ने क...

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बच्‍चों के स्वास्थ्य पर कोयले का प्रभाव: भारत के कोयला विस्तार से साक्ष्य

हाल के वर्षों में, भारत में कोयले से हो रहे बिजली उत्पादन में बड़ी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यह लेख भारत में कोयले से होने वाले बिजली उत्पादन से बच्‍चों के स्वास्थ्य और मानव संसाधन पर पड़ने वाले प्रभावों ...

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जलवायु क्षति के लिए अनुकूलन - विकासशील देशों के लिए वरदान या अभिशाप?

जलवायु पर अलग-अलग देशों की प्रतिबद्धताओं से यह साफ है कि पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग के ऐसे स्तर का सामना करने वाली है जिसकी सीमा सहनीय जलवायु नुकसान पहुंचाने वाले स्तर से काफी ऊपर होगी। और आगे चल के ...

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प्रारंभिक जीवन और वायु प्रदूषण से संपर्क: भारत में बच्चों पर प्रभाव

भारत की आधी से ज्यादा आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है जिसमें पीएम 2.5 की मात्रा राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों द्वारा तय किए गए वार्षिक सीमा से ज्यादा है। इस लेख में जियो-कोडेड जनसांख्यिकी और भा...

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क्या कम खर्च और विकल्प देकर गोवा को प्लास्टिक-मुक्त बनाया जा सकता है

प्लास्टिक-प्रदूषण से बिगड़ते हालात को देखकर समुद्री विशेषज्ञों को आशंका है कि वर्ष 2050 तक समुद्र में मछलियों से अधिक प्लास्टिक होगा। इस फील्ड नोट में शिशिर खरे ने गोवा में हो रहे प्लास्टिक-प्रदूषण के ...

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