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क्या साहूकार वित्तीय बिचौलिए हैं?

विकासशील देशों में ग्रामीण परिवारों द्वारा उधार अधिकांशत: अनौपचारिक ऋणदाताओं से लिया जाता रहा है। यह लेख 2000 के दशक की शुरुआत से ग्रामीण भारत में इन अनौपचारिक ऋणदाताओं और बैंकों के बीच संबंधों की जां...

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कार्यरत बैंक ऋण पर विवादों का प्रभाव: भारतीय सीमा क्षेत्रों से साक्ष्य

विवाद, महत्वहपूर्ण व्यक्तियों के निर्णयों के माध्यम से आर्थिक परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इस लेख में भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगातार गोलाबारी की घटनाओं के सीमावर्ती जिलों में कार्यरत ऋण अधिकारियों ...

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कोविड-19 झटका: अतीत के सीख से वर्तमान का सामना करना – तीसरा भाग

श्रृंखला के पिछले भाग में, डॉ. प्रणव सेन ने वर्तमान में जारी संकट के कारण हुई आर्थिक क्षति, और अगले तीन वर्षों में अर्थव्यवस्था के अपेक्षित प्रक्षेपवक्र के अनुमान प्रदान किए थे। इस भाग में, उन्‍होंने ...

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येस बैंक: एक संकट का गहन विश्‍लेषण

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में हाल के वर्षों में सामने आई धोखाधड़ी और असफलताओं की पूरी श्रृंखला, बैंकिंग पर्यवेक्षण की कमजोरियों को दर्शाती है। इस पोस्ट में, पांडे और प्रियदर्शिनी यह तर्क देते हैं कि रिज़...

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न्यायपालिका: अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ

आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में इस बात को मुख्‍य रूप से दर्शाया गया है कि भारत में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (व्यापार करने में आसानी) के लिए सबसे बड़ी बाधा ठेका (अनुबंध) प्रवर्तन और विवाद समाधान है, और यह भी की...

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पीएमसी बैंक की असफलता से सबक

पंजाब एंड महाराष्ट्र को-औपरेटिव बैंक (पीएमसीबी) धोखाधड़ी सामने आने के बाद सितंबर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पीएमसीबी पर प्रतिबंध लगाया था। आरबीआई ने यह कदम अपनी निगरानी और नियामक ढांचे को सुधा...

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बैंकिंग संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

पिछले पांच वर्षों में, भारतीयों बैंकों के नॉन पर्फॉर्मिंग एसेट (एनपीए) अर्थात डूबे हुए कर्ज की रकम में काफी वृद्धि हुई है। इन नॉन पर्फॉर्मिंग एसेट के साथ निवेश वृद्धि दर में भी तेज गिरावट दर्ज की गयी ...

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किसान क्रेडिट कार्ड कार्यक्रम: ऋण की उपलब्ध्ता का विस्तार या ऋण का प्रसार?

किसान क्रेडिट कार्ड कार्यक्रम – भारत में कृषि उधार में एक महत्वपूर्ण सुधार – का आरम्भ हुए लगभग 20 वर्ष हो गए हैं। हालांकि, लक्षित लाभार्थियों पर इसके प्रभाव का थोड़ा अनुभवजन्य साक्ष्य है। इस लेख में प...

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