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क्या सेवा की गुणवत्ता से ग्रामीण भारत में बिजली के कनेक्शन के लिए परिवारों की भुगतान करने की इच्छा का अनुमान लग सकता है?

  • Blog Post Date 16 अगस्त, 2019
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जहां ग्रामीण विद्युतीकरण विकासशील जगत में सरकारों की उच्च प्राथमिकता रही है, वहीं जिन कारणों से परिवारों द्वारा बिजली के लिए भुगतान करने की अधिक संभावना होती है, उन पर अपर्याप्त ध्यान दिया गया है। ग्रामीण परिवारों पर भारत के छः राज्यों के आंकड़ों का उपयोग करके इस आलेख में पाया गया है कि कनेक्शन के लिए भुगतान करने की इच्छा पर सर्विसकीगुणवत्ताका काफी असर पड़ता है, जो उपलब्धता में सुधार करने के लिए बहुत जरूरी है।

क्या बिजली की गुणवत्ता(क्वालिटी)से परिवारों द्वारा उसके लिए भुगतान करने की इच्छा पर प्रभाव पड़ता है? और अगर पड़ता है, तो कैसे? एक ओर, परिवारों को बिजली की स्थानीय सेवा पर्याप्त लेकिन बहुत महंगी लग सकती है। वहीं दूसरी ओर, परिवार सेवा के लिए भुगतान करना चाह सकते हैं और उसके लिए सक्षम भी हो सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं क्योंकि सेवा की गुणवत्ता उनकी जरूरतों को पूरा नहीं करती है। वर्ष 2014-15 में भारत के छः राज्यों में किए गए ग्रामीण परिवारों के विस्तृत सर्वे के आंकड़ों का उपयोग करके हमने इन प्रश्नों के उत्तर देने के प्रयास किए (कैनेडी, महाजन, और उर्पलेनन2019)।

तेज ग्रामीण विद्युतीकरण के दौर में सेवा की गुणवत्ता

भारत सरकार द्वारा सितंबर 2017 में शुरू की गई सौभाग्य योजना का लक्ष्य सभी ग्रामीण और गरीब परिवारों को बिजली का मुफ्त कनेक्शन उपलब्ध कराना है। एक साल पहले सरकार ने सर्वव्यापी ग्रामीण विद्युतीकरण का लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होने की घोषणा की थी। अभी तक के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कार्यक्रम के आरंभ में लक्षित 2.63 करोड़ परिवारों में से 19,000 से भी कम परिवार बिजली की पहुंच से बचे रह गए हैं (भारत सरकार, 2019)।

इस प्रभावशाली प्रगति के बावजूद लाखों घरों में अभी भी बिजली नहीं पहुंची है। इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल इलक्ट्रिसिटी पॉलिसी (आइसेप) द्वारा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में किए गए रिसर्च में इस विषमता पर प्रकाश डाला गया है। कुछ परिवार ग्रामीण विद्युतीकरण की टीमों द्वारा छूट गए औरवे उन्हें कनेक्शन नहीं दे पाए। दूसरों नेअवैध कनेक्शन के जरिए बिजली ले ली जिसे विद्युतीकरण की टीमों ने नजरअंदाज किया।

सबसे महत्वपूर्ण बात आइसेप ने यह पाई कि सरकार के उन परिवारों को नजरअंदाज किया जो अपना बिजली बिल नहीं चुकाना चाहते थे (उर्पलेनन 2019)। ग्रामीण परिवारों में बिजली की कम मांग होने (स्मार्ट पावर इंडिया, 2019) से भी लाखों परिवार छूटे रह गए हो सकते हैं।

वैध बिजली कनेक्शन लेने के लिए परिवारों की अनिच्छा की व्याख्या कैसे की जाय? सबसे पहले तो उत्तरी भारत के ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध होने वाली बिजली की गुणवत्तासंतोषजनक नहीं रहती है (जैन एवं अन्य 2018)। साथ ही, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलने के बावजूद अनेक गरीब परिवारों को बिजली का मासिक बिल और मीटर शुल्क देना अफोर्डेबल नहीं लगता है।

तो उपभोक्ताओं को बिजली का अधिक खर्च अनिच्छुक बनाताहै या उसकी खराब गुणवत्ता?पूर्व में किए गए रिसर्च (अल्कॉन, हरीश एवं उर्पलेनन2016, रहमान एवं अन्य 2013, रिले2014, विंक्लर एवं अन्य 2011) के विपरीत,यह समझकर कि बिजली की सेवा की गुणवत्ताउसके लिए भुगतान करने की इच्छा को कैसे प्रभावित करती है, हमारे रिसर्च में इन दोनो प्रभावों को अलग करने का प्रयास किया गया है।

परिवारों का खुद चुनाव कि कनेक्शन लेना है या नहीं लेना है

अध्ययन करने के लिए हमने भारत के छः राज्यों के 714 गांवों के 8,500 परिवारों के आंकड़ों वाले 2014-15 के ऍक्सेस (ऍक्सेस टू क्लीन कूकिंग इनर्जी एंड इलक्ट्रिसिटी: सर्वे ऑफ स्टेट्स) सर्वे पर भरोसा किया (एक्लीन एवं अन्य 2016)।

डेटासेट में हर अविद्युतीकृत घर के मुखिया की भुगतान करने की इच्छा शामिल है जिसने हमारे 'डिपेंडेंट वैरिएबल'1 का काम किया। गांव में कनेक्शन वाले परिवारों को औसत गुणवत्ता वाली बिजली उपलब्ध होना 'एक्सप्लेनेटरी वैरिएबल' है। हमने बिजली कनेक्शन के लिए परिवारों की भुगतान करने की इच्छा को प्रभावित करने वाले अनेक विशेषताओं का नियंत्रण भी किया।

बिजली की गुणवत्ता और उसके लिए परिवारों की भुगतान करने की इच्छा के बीच संबंध को समझने के लिए सर्वे के आंकड़ों के उपयोग ने एक चुनौती पेश की क्योंकि इससे यह पता नहीं चलता है कि जिस समय सर्वे किया गया था उस समय कितने विद्युतीकृत परिवार बिजली कनेक्शन के लिए भुगतान करने के इच्छुक रहे होंगे। विद्युतीकृत परिवारों के उत्तरों से अधिक से अधिक यही पता चलता है कि अगर उनके पास कनेक्शन नहीं होता तो वे कनेक्शन के लिए कितना भुगतान करना चाह रहे होते।2

जिन स्थानों पर सेवा की गुणवत्ता अच्छी है, वहां के परिवारों द्वारा भी कनेक्शन के लिए भुगतान करने की संभावना है इसलिए उनकी भुगतान करने की इच्छा को मापना संभव नहीं रह जाता है। फलस्वरूप, परिवारों द्वारा भुगतान करने की इच्छा पर सिर्फ अविद्युतीकृत परिवारों से आंकड़े एकत्र किए गए। हालांकि सिर्फ उनके उत्तरों पर भरोसा कर लेने से चुनाव संबंधी पूर्वाग्रह पैदा होगा।3 कनेक्शन वाले और बिना कनेक्शन वाले पूरे सेंपल की तुलना में बिजली के लिए भुगतान करने की सूचना देने वाले लोगों के बारे में अधिक संभावना इस बात की है कि वे उन गांवों में रहते हैं जहां खराब गुणवत्ता वाली बिजली की सप्लाई होती है। फलतः, इन टिप्पणियों से निकाले गए निष्कर्षों से सेंपल वाले सारे गांवों के बजाय बिजली की खराब गुणवत्ता वाले गांवों का व्यवहार स्पष्ट होता है।

इस पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए हमने सबसे पहले तो जिस गांव में परिवार का घर है, उसके आकार के आधार पर अनुमान किया कि परिवार को ग्रिड आधारित बिजली उपलब्ध नहीं है। अन्य सारी चीजों के समान रहने पर परिवार के स्वाभाविक गांव का आकार बिजली के लिए भुगतान की इच्छा को प्रभावित करने वाले अन्य विशेषताओं से असंबद्ध होता है। उसके बाद उनके स्वाभाविक गांवों के आकार के आधार पर ग्रिड वाली बिजली नहीं पाने वाले परिवारों के सेट के साथ हमने ग्रिड वाली बिजली पाने वाले वैसे ही अनुमानित संभावना वाले परिवारों की भुगतान करने की इच्छा के साथ तुलना की।

सेवा की गुणवत्ता परिवारों की भुगतान करने की इच्छा को प्रभावित करती है

हमने पाया कि उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत सेवा परिवारों की भुगतान करने की इच्छा कोकाफी प्रभावित करती है। आकृति 1 में तीन मॉडलों का उपयोग करके किसी गांव में उपलब्ध बिजली की गुणवत्ता और परिवारों की भुगतान करने की इच्छा के बीच संबंध दर्शाया गया है।

ऊपर-बाएं से क्लॉकवाइज बढ़ने पर हमने सबसे पहले टिपिकल 24 घंटे की अवधि में उपलब्ध बिजली के कुल घंटों के आधार पर गुणवत्ता मापी है। दूसरे में हमने रात में, खास कर सूर्यास्त से आधी रात के बीच उपलब्ध बिजली के आधार पर गुणवत्ता मापी है। और तीसरे में 0 से 1 रेंज वाले गुणवत्ता इंडेक्स के आधार पर गुणवत्ता मापी गई है जिसमें कुल घंटों, रात के घंटों, और आम महीने में बिजली जाने और बिजली के उपकरणों को नुकसान पहुंचाने वाले वोल्टेज में उतार-चढ़़ाव शामिल हैं। गुणवत्ता के आंकड़े कनेक्शन वाले परिवारों द्वारा खुद दिए गए हैं और उसके बाद उन्हें गांव स्तर पर समूहित किया गया है।

चित्र तीनो मॉडलों में गुणवत्ता और कनेक्शन के लिए भुगतान करने की परिवारों की इच्छा के बीच पॉजीटिव संबंध दर्शाता है। गांव को मिलने वाली कुल बिजली और रात के समय मिलने वाली बिजली 1 घंटे बढ़ने पर परिवारों द्वारा भुगतान करने की इच्छा क्रमशः 13 प्रतिशत और 34 प्रतिशत बढ़ जाती है। इसी प्रकार, गुणवत्ता स्केल पर गुणवत्ता में पाइंट के 10वें हिस्से में वृद्धि से भुगतान करने की इच्छा लगभग 50 प्रतिशत बढ़ जाती है।

आकृति 1. गुणवत्ता के तीन अलग-अलग पैमानों का उपयोग करने पर बिजली की गुणवत्ता का भुगतान करने की इच्छा पर प्रभाव

टिप्पणी: आकृतिभुगतान करने की इच्छा पर बिजली की विश्वसनीयता के प्रभाव के लिए लीनियर प्रेडिक्शन और 95 प्रतिशत कंफिडेंस इंटर्वल4(सीआइ) दर्शाते हैं।

इस बात पर गौर करके कि औसत अविद्युतीकृत परिवारों ने कनेक्शन के लिए 399 रु. भुगतान करने की इच्छा जतलाई, हम गुणवत्ता में सुधार के मॉनीटरी प्रभाव पर भी विचार कर सकते हैं। कुल बिजली और रात में बिजली की सप्लाई एक घंटा बढ़ने से इसमें क्रमशः 52 रु. और 136 रु. के आसपास वृद्धि होती है। वहीं गुणवत्ता में 1/10 पाइंट की वृद्धि होने पर भुगतान करने की इच्छा लगभग 192 रु. बढ़ जाती है।

सेवा की गुणवत्तामें सुधार जरूरी है

ग्रामीण विद्युतीकरण के मामले में भारत की अनेक समस्याएं विद्युत वितरण कंपनी के खराब वित्तीय प्रदर्शन के कारण पैदा होती हैं (जोसेफ 2010, सांताकुमार 2008)। उनका प्रदर्शन आंशिक रूप से देश के विद्युतीकरण संबंधी प्रयासों की उपज है, जिनमें भुगतान करने की अधिक इच्छा रखने वाले समुदायों को टारगेट करने के बजाय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सब्सिडी वाली कीमत पर फोकस किया गया है (पालित एवं बंद्योपाध्याय 2017)।

हमारे परिणाम सुझाते हैं कि भारतीय नीतिनिर्माता सेवा की गुणवत्ता सुधार कर ‘वर्चुअस साइकल’ की शुरुआत कर सकते हैं। ऐसा करने से बिजली की मांग बढ़ेगी जिसमें अधिक परिवार अधिक खर्च करके कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित होंगे। फलतः इससे वितरण कंपनियों के लिए विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण का वास्तविक व्यय वसूल करने की गुंजाइश बनेगी जिससे इन सुधारों के लिए भुगतान करने में मदद मिलेगी।

लेखक परिचय: रायन कैनेडी ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान के सेनेटर डॉन हेंडरसन चेयर हैं। असीम महाजन हार्वर्ड विश्वविद्यालय के गवर्नमेंट विभाग में पीएच.डी. उम्मीदवार हैं। योहैनस उर्पलेनन जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज में निदेशक और प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज प्रोफेसर ऑफ एनर्जी, रिसोर्सेज एंड एनवायरनमेंट, और इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी (ISEP) के संस्थापक निदेशक हैं।

नोट्स:

  1. डिपेंडेंट वैरिएबल ऐसे वैरिएबल होते हैं जिनकी व्याख्या रिग्रेशन मॉडल में की जाती है जिनका मान इंडिपेंडेंट या एक्सप्लेनेटरी वैरिएबल कहे जाने वाले एक या अधिक वैरिएबल्स के मान पर निर्भर करता है।
  2. बारे में कि बिजली खरीदनी है या नहीं, विद्युतीकृत परिवारों के निर्णय कनेक्शन के लिए भुगतान करने की उनकी इच्छा के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं, वहीं इससे लोवर बाउंड (वास्तविक से कम) जानकारी मिलती है क्योंकि बिजली पर सब्सिडी होती है और उसे बाजार मूल्य से कम में खरीदा जाता है। इसके अलावा, चूंकि बिजली का कनेक्शन पाने का खर्च समय और भूगोल पर निर्भर करता है, इसलिए हो सकता है कि कनेक्शन वाले परिवारों ने अभी अविद्युतीकृत परिवारों द्वारा लगने वाले अलग-अलग खर्चों के रिस्पांस में ऐसा किया हो।
  3. चयन पूर्वाग्रह ('सलेक्शन बायस') तब पैदा होता है जब किसी आबादी से ऑब्जर्वेशन को रैंडम नहीं चुना जाता है, और इसलिए वह उस आबादी का प्रतिनिधि नहीं होता है।
  4. कंफिडेंस इंटर्वल एक प्रकार का इंटर्वल एस्टीमेट या रेंज होता है (जिसकी गणना देखेगएडेटा या ‘सेंपल’ के जरिए की जाती है), जिसमें किसी अज्ञात पॉपुलेशन पैरामीटर का सही मान शामिल हो सकता है। ज्यादातर 95 प्रतिशत कंफिडेंस लेबल का उपयोग किया जाता है जो आकलनकीप्रक्रियाकी विश्वसनीयता से संबंधित होता है। इसका अर्थ हुआ कि असली पॉपुलेशन पैरामीटर को समेटने वाले कल्कुलेटेड कंफिडेंस इंटर्वल का हिस्सा लगभग 95 प्रतिशत होगा।
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