सामाजिक पहचान

बार में शराब का सेवन और सार्वजनिक स्थान में महिलाओं की सुरक्षा का प्रबन्ध

  • Blog Post Date 04 दिसंबर, 2019
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Saloni Khurana

Indian Institute of Foreign Trade

saloni.khurana471@gmail.com

बार ऐसे परिसर हैं जिनमें शराब प्रदान किया जाता हैं और सामाजिक रुप से शराब पीने के स्थान के रुप में जाने जाते हैं। 2014 में, केरल ने राज्य में शराब बेचने वाले वाले सभी बारों को बंद कर दिया। इस लेख में नीति में हुए बदलाव की जांच की गई है। साथ ही यह भी जानने की कोशिश की गई है कि इस बदलाव से घरों के बाहर महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराधों की आशंकाओं पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं। जांच में यह बात सामने आई है कि, नियम में बदलाव के बाद, महिलाओं के खिलाफ यौन हमलों की सूचित दरों में 25% की कमी आई है जबकि बलात्कार के मामलों पर स्पष्ट प्रभाव नहीं दिखाई देते हैं।

 

अक्सर अपराध का एक प्रमुख कारण शराब का सेवन माना जाता है। शराब और अपराध के बीच का लिंक इस तथ्य से उत्पन्न हुआ है कि नशा करने के पश्चात अक्सर लोगों का खुद पर संयम नहीं रहता और वे गलत कामों को अंजाम देते हैं। 2010 में जागोरी और यूएन वीमेन द्वारा सेफ सिटी पहल के तहत किए गए एक सर्वेक्षण में, दिल्ली में 50% महिलाओं ने घर के बाहर अपनी सुरक्षा के लिए खतरे का कारण पुरुषों द्वारा शराब का सेवन बताया। देश भर में ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनसे पता चलता है कि शराब के प्रभाव में अपराध करने और आकस्मिक मृत्यु दर में वृद्धि की प्रवृति ज्यादा होती है (अध्ययन की समीक्षा के लिए कारपेंटर एंड कार्लोस (2010), कारपेंटर एंड डोबकिन (2011) देखें।) हालांकि, महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सबूत सीमित हैं।

शराब सेवन का विनियमन और अपराध

अर्ध-प्रायोगिक अध्ययन आम तौर पर, अपराधों पर सार्वजनिक नीति उपकरणों के प्रभाव की जांच करते हैं, जैसे कि शराब पर कर, शराब की दुकानों का घनत्व, शराब पीने की कानूनी आयु (एमएलडीए) और निषेध। भारतीय संदर्भ में दो अध्ययन हैं - लुका एवं अन्य (2015) और लुका एवं अन्य (2019) – जो यह दिखाते हैं कि भारत में शराब पर प्रतिबंध और शराब पीने की आयु (एमएलडीए) ज्यादा रखने से घरेलू हिंसा और महिलाओं के यौन उत्पीड़न की घटनाओं में काफी कमी आई है।1

विश्व स्तर पर, शराब पीने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर इसके प्रभाव के सीमित सबूत हैं। एंडरसन एवं अन्य (2018) ने यह पाया हैं कि अमेरिका के कैंसस राज्य में बार घनत्व में वृद्धि से बलात्कार, डकैती और सामान्य हमलों की घटनाएं ज्यादा रिपोर्ट की गई है। बिडरमैन एवं अन्य (2009) दिखाते हैं कि ब्राजील के साओ पाओलो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में बारों के जल्द बंद होने से मानव-हत्या की घटनाओं में कमी हुई है। सार्वजनिक नीति के दृष्टिकोण से, यह समझना महत्वपूर्ण है कि किन अपराधों पर किस प्रकार के नियम प्रभावी हैं क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है।

नीति पृष्ठभूमि - केरल के नियम में बदलाव

पिछले कुछ दशकों में, भारत के कई राज्यों ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया - आंध्र प्रदेश, हरियाणा, मिजोरम, उड़ीसा, तमिलनाडु - और फिर प्रतिबंधों को रद्द कर दिया। भारत में हालिया बहस ने शराब के सेवन के खिलाफ लड़ाई को फिर से गरमा दिया है। बिहार ने 2016 में इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। तमिलनाडु ने 2016 से शराब की दुकानों को धीरे-धीरे बंद करना शुरू कर दिया है। 2014 में, केरल ने अपने स्थानीय बार में शराब की बिक्री और खपत पर सख्ती की।

केरल में नियम बदलाव के पीछे जो राजनीतिक आर्थिक विचार थे, उसके लिए यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार के भीतर आंतरिक पार्टी की राजनीति, विपक्ष द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप जिम्मेदार थे और मुख्यमंत्री भी शराब लॉबी के पक्ष में नहीं दिखना चाहते थे। नतीजतन, यूडीएफ सरकार ने एक कानून पारित किया जिसका उद्देश्य 2023 तक राज्य में पूरी तरह से शराब पर रोक लगाना था। पहले कदम के रूप में, केरल सरकार ने शराब बेचने वाले स्थानीय बारों को बंद कर दिया। केवल पांच सितारा होटलों में बार को ही इसे बेचने की अनुमति थी। इस कारण अप्रैल में लाइसेंस रीन्यू ना हो पाने पर 418 बार बंद हो गए। कुल मिलाकर, अगस्त तक निजी होटल व्यवसायियों द्वारा संचालित 730 विदेशी शराब बार और सरकार द्वारा संचालित खुदरा दुकानों के कुल आउटलेट के 10% बंद हो गए थे। ताड़ी (मामूली रूप से मादक, स्थानीय रूप से पीया जाने वाला पेय), वाइन और बीयर की दुकानों पर प्रतिबंध का कोई प्रभाव नहीं था। इनमें से कई बार, वाइन और बीयर पार्लर के रूप में फिर से खुल गए।

केरल भारत में सबसे विकसित राज्यों में से एक है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाओं को रिपोर्ट करने वाले टॉप पांच राज्यों में से एक है, यह संभवत: बेहतर रिपोर्टिंग के कारण हो सकता है। 2001 में, महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 3.33 थी और 2011 में 6.50 हो गयी थी, लेकिन राज्य में, 2015 में ऐसी घटनाओं में गिरावट आई है (आकृति 1)। 2011 में, केरल में वयस्कों द्वारा सभी प्रकार के शराब का प्रति-व्यक्ति वार्षिक खपत राष्ट्रीय औसत से भी अधिक था(विदुकुमार एवं अन्य 2016)। यह समझना महत्वपूर्ण है कि क्या केरल में अपराध में गिरावट का कारण शराब बार के नियम में बदलाव हैं या कुछ और।

आकृति1. वर्ष 2001, 2011, 2015 में महिलाओं के खिलाफ राज्यानुसार कुल अपराध

स्त्रोत: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) (लेखकों द्वारा खुद की गणना)

आकृति में दिये अँग्रेजी शब्दों का अर्थ:

Crimes per 10,000 female population – अपराध प्रति 10,000 महिला जनसंख्या

State-wise variation - राज्यानुसार भिन्नता

केरल में इस नीति के बदलाव का तात्कालिक परिणाम शराब तक पहुंच की लागत में वृद्धि होना था, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में 2014-15 से 2015-16 के बीच शराब की खपत में 18% तक कमी आई है (केरल राज्य पेय-पदार्थ निगम)। इसके साथ ही बीयर की ओर झुकाव भी देखा गया। हालांकि बीयर की मादक सामग्री कम है, यह कहना मुश्किल है कि इस तरह के नियम बदलाव का इस पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं। अगर पुरुष बीयर को विकल्प के रूप में चुन लेते हैं और नियम बदलाव से पहले जितना ही मद्यपान स्तर हासिल कर लेते हैं, तो शायद इसका कोई प्रभाव नहीं हो सकता है। इसके अलावा, घर पर शराब पीने में वृद्धि होना घरेलू हिंसा में तेजी का कारण बन सकता है। दूसरी ओर, बारों में मद्यपान में गिरावट घरेलू हिंसा को भी कम कर सकता है। इसलिए, हमने रिपोर्ट किए गए  प्रभाव को घरेलू हिंसा की घटनाओं पर भी देखा है।

प्रभाव का आकलन

हमने वर्ष 2010-2015 के लिए रिपोर्ट किए गए अपराधों पर जिला-स्तरीय पैनल डेटा2 इकट्ठा किया। नियम लागू होने से पहले के वर्षों क पूर्व-ट्रीटमेंट वर्ष (2010-2013) के रुप में संदर्भित किया गया और इसके लागू होने के बाद के वर्षों को ट्रीटमेंट वर्ष (2014-2015)3 कहा गया है। यौन हमलों और बलात्कार जैसी महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर इस नीति बदलाव के प्रभाव के अध्ययन के लिए हमने डिफरेंस-इन-डिफरेंस एसटिमेशन4 रणनीति का इस्तेमाल किया है (पड़ोसी राज्यों को 'नियंत्रण' समूह के रूप में उपयोग करके)। हमने केरल के जिलों (ट्रीटमेंट) के लिए औसत सूचित अपराध बदलाव की तुलना केरल की सीमा पर स्थित पड़ोसी राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु (नियंत्रण) के जिलों से की है।

केरल के भीतर जिला-वार ट्रीटमेंट की तीव्रता अलग-अलग है चूंकि बारों का मौजूदा स्टॉक अलग था। यह जांचने के लिए कि क्या ज्यादा बार बंद होने वाले जिलों में अपराध में कमी ज्यादा थी हमने इस अतिरिक्त जानकारी का इस्तेमाल किया।5

परिणाम

हमने यह पाया है कि बार में शराब पर रोक लगाने के बाद महिलाओं द्वारा रिपोर्ट किए गए यौन उत्पीड़न के मामलों में, प्रति-जिला 73 घटनाओं की कमी हुई है, यानी करीब 25% की कमी हुई है (आधारभूत औसत के अनुपात के रूप में)। जब हम समय के साथ प्रति-व्यक्ति पुलिस और आय में बदलाव का नियंत्रण करते हैं, तो ये परिणाम और मजबूत होते हैं (30% की कमी)। आकृति2 पूर्व और बाद के ट्रीटमेंट वर्षों के लिए वर्ष-वार प्रभाव दिखाता है। स्पष्ट रूप से, पूर्व-ट्रीटमेंट के वर्षों में यौन हमलों में कोई कमी नहीं हुई है और यह केवल नियम बदलाव के बाद ही हुआ है।

इसके अलावा, यौन हमलों में कमी उन जिलों में अधिक है जहां बड़ी संख्या में बार (प्रति 100,000 जनसंख्या) बंद हो गए थे। हमने छेड़छाड़ और बलात्कार के मामलों में कमी भी पाई लेकिन प्रभाव सटीक नहीं है। घरेलू हिंसा पर नीति में बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पाया गया है। वैकल्पिक अनुमान पद्धति के परिणाम, जहां डेटा-संचालित विधियों का उपयोग करके नियंत्रण समूह चुना जाता है, नियम बदलाव के बाद यौन हमलों में कमी के बारे में हमारे पिछले निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं।6

आकृति 2. घटना अध्ययन प्लॉट: महिलाओं के खिलाफ यौन हमले

आकृति में दिये अँग्रेजी शब्दों का अर्थ:

Pre-regulation: अधिनियम के पूर्व

Post-regulation: अधिनियम के पश्चात

क्रियाविधि

हमने परिकल्पना की कि मुख्य क्रियाविधि, जिसके परिणामस्वरुप घटनाओं में कमी हुई है, वह नियम बदलाव के बाद पीड़ित और नशेबाज अपराधी के बीच पारस्परिक संपर्क की कमी होने की संभावना होने के कारण है। एक अन्य संभावित क्रियाविधि, 2014 के बाद केरल में अपराधों में सामान्य कमी हो सकती है। प्रारंभिक खपत और ट्रीटमेंट की तीव्रता में भिन्नता के साथ हमारे अनुमान और अन्य अपराधों पर प्रभाव का आकलन दूसरे क्रियाविधि पर संदेह उत्पन्न करता है।

सबसे पहले हमने उन जिलों में यौन हमले के मामलों में ज्यादा कमी पाई जहां शराब की खपत पर रोक लगाई गई थी और बड़ी संख्या में बार बंद हुए थे। दूसरा, हमने चोट, लूट, चोरी, अपहरण, और हत्या जैसे अन्य अपराधों पर प्रभाव की जांच की। एकमात्र महत्वपूर्ण कमी चोट में देखी गई है, जो ज्यादातर झगड़े के दौरान होने वाली शारीरिक हमलों की घटनाओं को दर्ज करता है। इन झगड़ों की संभावना ज्यादातर शराब के प्रभाव में होने के कारण होती है।

निष्कर्ष

इस अध्ययन में, हमने यह जानने की कोशिश की है कि बार जैसे सामाजिक स्थानों में शराब की उपलब्धता में कमी से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर क्या प्रभाव पड़ता है। जैसा कि बार सार्वजनिक क्षेत्रों में परिसर के भीतर शराब पीने की अनुमति देते हैं, बार में शराब पीना एक संभावित अपराधी और संभावित पीड़ित के बीच सामाजिक संपर्क की संभावना को बढ़ा सकता है। इसका नतीजा सार्वजनिक क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा अनुभव किए जाने वाले यौन हमलों में वृद्धि हो सकता है। इस अध्ययन में माना गया नियम बदलाव से घर के बाहर शराब पीने की संभावना कम होती है, जिसके परिणामस्वरुप नशे की हालत के तहत पारस्परिक संपर्क की संभावना में कमी होती है। हमने यह भी पाया हैं कि शराब बिक्री करने वाले दुकानों को बंद करना शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है और महिलाओं के खिलाफ यौन हमलों और उत्पीड़नाओं की घटनाओं को कम करता है।

नोट्स:

  1. डार और सहाय द्वारा हाल ही में एक अप्रकाशित अध्ययन में सामान्य रूप से हिंसक और अहिंसक अपराधों पर भारत में बिहार राज्य में लगाए गए शराब प्रतिबंध के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है।
  2. आंकड़ों में, पैनल डेटा में एक ही कंपनी या व्यक्तियों के लिए कई समय-अवधि में प्राप्त कई डाटा के अवलोकन होते हैं।
  3. नवीनतम वर्ष, जिसके लिए अपराध संबन्धित डेटा उपलब्ध है, 2016 है, लेकिन हम मुख्य पेपर में प्रस्तुत विश्लेषणों को 2015 तक सीमित कर देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि केरल के पड़ोसी राज्यों में से एक, अर्थात् 2016 में तमिलनाडु में, शराब के चरण-वार बंद होने की शुरुआत हुई। निष्कर्ष, हालांकि, वर्ष 2016 के डेटा को शामिल किए जाने पर परिवर्तन नहीं होता है।
  4. इसी तरह के समूहों में समय के साथ परिणामों के विकास की तुलना करने की तकनीक जो उन लोगों के साथ एक हस्तक्षेप तक पहुंच प्राप्त करती है जो नहीं करते थे।
  5. हम सिंथेटिक नियंत्रण निर्माण विधियों (अबादि एट अल। 2010) का उपयोग करके अपने परिणामों की मजबूती को भी सत्यापित करते हैं। इस पद्धति में, सीमावर्ती जिलों और राज्यों को नियंत्रण समूह के रूप में लेने के बजाय, हम डेटा को उन जिलों के आधार पर नियंत्रण वाले जिलों को देने की अनुमति देते हैं जो केरल के जिलों में अपराधों के रुझानों से मेल खाते हैं, इससे पहले कि सलाखों को बंद कर दिया गया था।
  6. यह तरीका केरल में 2014 के बाद घरेलू हिंसा में उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाता है।

लेखक परिचय: कनिका महाजन अशोका यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। सलोनी खुराना नई दिल्ली स्थित भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफ़टी) में एक शोध सहयोगी और गेस्ट लेक्चरर हैं।

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