समष्टि अर्थशास्त्र

कोविड-19: विपरीत पलायन से उत्‍पन्‍न होने वाले जोखिम को कम करना

  • Blog Post Date 03 जुलाई, 2020
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भारत में कोविड-19 लॉकडाउन से सबसे बुरी तरह प्रभावित वर्गों में से एक वर्ग प्रवासी मजदूरों का है, जो बेरोजगार, धनहीन और बेघर हो गये हैं। हालांकि कई राज्य सरकारों द्वारा प्रवासी मजदूरों को वापस लाने और उनके सुरक्षित आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह ‘विपरीत पलायन’ राज्‍यों के भीतरी क्षेत्रों में संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ाता है। इस आलेख में, पारिख, गुप्ता, और सुभम इस बात पर चर्चा करते हैं कि कैसे राज्य इस शीघ्र संभावित जोखिम को कम कर सकते हैं।

 

भारत 50 दिनों से अधिक समय से लॉकडाउन की स्थिति में है। हालाँकि लॉकडाउन को कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक रूप से अनिवार्य विकल्‍प के रूप में स्वीकार किया जाता है। परंतु, अधिकांश जनमत, विशेष रूप से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों द्वारा झेली गई कठिनाई को देखते हुए, नागरिकों के कल्याण पर लॉकडाउन के समग्र प्रभाव पर विभाजित दिखाई देते हैं। सबसे बुरी तरह प्रभावित वर्गों में से एक वर्ग प्रवासी मजदूरों का है, जो रोजगार और आजीविका के अवसरों की तलाश में अपने गृह राज्य छोड़कर दूसरे राज्य जाते हैं। तथापि, कोविड-19 संकट ने इन मजदूरों को बेरोजगार, धनहीन और बेघर बना दिया है। भुखमरी के जोखिम को सामने देख, बड़ी संख्‍या में गरीब तथा असहाय प्रवासियों ने अपने गृह राज्यों में लौटने का फैसला किया। परिवहन विकल्प न होने के कारण कई लोग ने चिलचिलाती धूप में एक अंतहीन पैदल यात्रा शुरू कर दी।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों की सरकारों ने मार्च के अंत से ही अंतर-राज्य बसों की व्यवस्था करके प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए लगातार प्रयास आरंभ कर दिए थे। इसका अनुसरण करते हुए, भारतीय रेलवे ने 1 मई 2020 को देशव्यापी विशेष 'श्रमिक एक्सप्रेस' ट्रेनों की शुरुआत की। हालांकि, अपने घरों से दूर फंसे लोगों की सुरक्षित आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए इस तरह के उपाय आवश्यक हैं, लेकिन इस 'विपरीत पलायन' के कारण उन राज्‍यों के भीतरी इलाकों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है जहां ये श्रमिक वापस लोटते हैं, और जहां अक्सर परीक्षण, आइसोलेशन वार्ड और वेंटिलेटर के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे का अभाव होता है। अखिल भारतीय स्तर पर, यह ध्यान दिया जा सकता है कि तीन प्रमुख राज्य - राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार - मुख्य रूप से चार प्रमुख औद्योगिक राज्यों - महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली (एनसीटी - राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) और पश्चिम बंगाल को प्रवासी श्रम प्रदान करते हैं, जो सभी कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, तथा राजस्थान जैसे राज्य विपरीत पलायन द्वारा उत्पन्न शीघ्र संभावित जोखिम को कैसे कम कर सकते हैं?

आकृति 1. भारत में राज्य-स्तरीय प्रवासन नेटवर्क

नोट: तीर रेखा का निशान प्रवास की दिशा को दर्शाता है, और जबकि किनारे की मोटाई प्रवास की मात्रा को ।

स्रोत: जनगणना, 2011

इस तरह के सवालों का जवाब देने और महामारी के प्रसार को रोकने की दिशा में, पहला और आवश्यक कदम यह निर्धारित करना है कि कौन संक्रमित है, और देश के विभिन्न हिस्सों में कितने लोग संक्रमित हैं। यह जानना की कौन संक्रमित है, संक्रमित को अलग करने, संपर्क अनुरेखण तथा संक्रमण के संभावित मामलों का पता लगाने हेतु एक सूक्ष्म-रणनीति के निर्माण में मदद करता है। दूसरी ओर, यह अनुमान लगाना की कितने लोग संक्रमित हैं, आर्थिक क्षेत्र को खोलने या लाकडाउन करने, लोगों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने की अनुमति देने, तथा चिकित्सा संसाधनों का प्रभावी आवंटन करने हेतु एक व्‍यापक रणनीति बनाने में मदद करता है।

स्थिति का जायजा लेना

महामारी के प्रसार की सीमा को समझने का सबसे अच्छा तरीका "परीक्षण, परीक्षण, परीक्षण" है, जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस घेब्रेयियस ने उल्लेख किया है। हालांकि, विशेष रूप से भारत जैसे विशाल और आबादी वाले देश में आवश्यक परीक्षण किटों की संख्या एक प्रमुख सीमितकारी कारक है। एक अरब से अधिक लोगों का परीक्षण एक व्यवहार्य विकल्प नहीं है। हालांकि, सांख्यिकीय विधियों का उपयोग करके संक्रमित रोगियों की संख्या का आकलन करके, इस बात का उत्‍तर दिया जा सकता है कि ‘क्‍या’ भारत के किसी क्षेत्र में अतिरिक्‍त परीक्षणों की आवश्‍यकता है और ‘कितनी’ संख्‍या में यह आवश्‍यकता है तथा कौन से क्षेत्र पर्याप्‍त संख्‍या में परीक्षण कर रहे हैं।

आकृति 2. भारत में कोविड- 19 के अनुमानित मामले बनाम पुष्टि किए गए मामलों की कुल संख्या

स्रोत: https://github.com/covid19india से आंकड़ों का उपयोग करते हुए लेखकों का अनुमान

आकृति में उपयोग किए गए अंग्रेज़ी शब्दों/वाक्यों का अर्थ:

Estimated actual infections अनुमानित वास्तविक संक्रमण

Confirmed cases – पुष्ट मामले

Number of Covid-19 cases in India - भारत में कोविड़-19 मामलों की संख्या

आकृति 3. 16 मई 2020 तक पुष्टि किए गए मामलों की तुलना में राज्यवार अनुमानित वास्तविक संक्रमित मामले

आकृति में उपयोग किए गए अंग्रेज़ी शब्दों/वाक्यों का अर्थ:

Estimated Actual Infected (as of May 16, 2020) - अनुमानित वास्‍तविक संक्रमित (16 मई 2020 को)

Confirmed Cases (as of May 16, 2020) - पुष्टि किए गए मामले (16 मई 2020 को)

मई के मध्य तक पुष्टि किए गए मामलों की संख्‍या 90,819 है, लेकिन हमारे अनुमान के अनुसार संक्रमणों की वास्तविक संख्या 250,000 और 400,000 के बीच होनी चाहिए, जैसा कि आकृति 2 में दिखाया गया है। ये अनुमान कोविड-19 के घातक दर, परीक्षण सकारात्‍मकता अनुपात तथा परीक्षण प्रति दस लाख लोग पर आधारित हैं। जैसा कि विभिन्न राज्य अपनी जनसांख्यिकी स्थिति और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की क्षमता के अनुसार अलग-अलग होते हैं, हमने भी उपर्युक्त सांख्यिकीय दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए राज्य स्तर पर स्थिति का आकलन किया, जैसा कि आकृति 3 में दिखाया गया है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि कोविड-19 से सबसे बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह अनुमान है कि वर्तमान में पुष्टि किए गए मामलों की संख्‍या की तुलना में परीक्षण के बाद वास्तविक मामलों की संख्‍या कहीं अधिक होगी। यह अंतर विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और गुजरात के राज्यों के लिए भयावह है, और यहां अतिरिक्त परीक्षणों की विशेष आवश्यकता है। हमारा मानना हैं कि स्तरीकृत यादृच्छिक परीक्षण या तो आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन - पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) या रैपिड एंटीबॉडी परीक्षण का उपयोग कर कोविड-19 मामलों की प्रारंभिक पहचान और विभिन्न उप-आबादी के संक्रमण की वास्तविक संख्या के आकलन के लिए फायदेमंद होंगे। यह आगे राज्यों के भीतर और राज्‍यों के बीच व्‍यापक रोकथाम रणनीतियों को डिजाइन करने में मदद करेगा।

विपरीत पलायन से उत्‍पन्‍न होने वाले जोखिम का मुकाबला करना

कोविड-19 काल में विपरीत पलायन करने वाले प्रवासियों और उनके गृह राज्यों के निवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा करता है। जैसा कि नियोक्ता-राज्य औद्योगिक राज्य हैं, वहां उच्च जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र हैं जहां संक्रमण का प्रसार अधिक है। प्रवासी मजदूरों की संख्‍या का एक बड़ा अनुपात इन उच्च घनत्व क्षेत्रों में रहते हैं और इसलिए उनके संक्रमित होने की ज्यादा संभावना है। इसके अलावा, प्रवासियों के गृह राज्यों की स्वास्थ्य सुविधाएँ आम तौर पर सीमित होती हैं और वे आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, जैसा कि आकृति 4 में दिखाया गया है। इस प्रकार, जब ये प्रवासी बडी संख्‍या में अपने गृह राज्य वापस लौटते हैं तो इन राज्यों को इस जोखिम का मुकाबला करने में अतिरिक्त सतर्कता बरतने और रणनीति बनाने की आवश्यकता है। आकृति 5 से यह देखा जा सकता है कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में नए मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जो विपरीत पलायन के संपार्श्विक प्रभाव होने के कारण हो सकती है।

आकृति 4. भारतीय राज्यों में प्रति दस लाख लोगों पर आईसीयू बिस्‍तर और वेंटिलेटर की संख्या

स्रोत: कपूर एवं अन्‍य (2020)

आकृति में उपयोग किए गए अंग्रेज़ी शब्दों/वाक्यों का अर्थ:

ICU Beds per million people - प्रति दस लाख लोगों पर आईसीयू बिस्‍तरों की संख्‍या

Ventilators per million people - प्रति दस लाख लोगों पर वेंटिलेटर की संख्‍या

आकृति 5. भारतीय राज्‍यों में सक्रिय पुष्‍ट मामले

प्रवासियों की यात्रा का पैटर्न इस पूरी स्थिति के लिए एक आशा की किरण प्रदान करता है। एक ही स्‍थान से एक ही स्‍थान तक समूहों में यात्रा करना प्राकृतिक समूहकरण का कारण बनता है। दोहरा यादृच्छिक परीक्षण, यानि जिस राज्य से यात्रा शुरू होती है एक उसके द्वारा और जहां तक यात्रा की जा रही है दूसरा उस राज्‍य के द्वारा - इन समूहों में से प्रत्येक में संक्रमण की प्रवृत्ति का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। इसके साथ-साथ यदि अधिकारियों को एक समूह के भीतर सकारात्मक नमूनों की एक बड़ी संख्या का पता चलता है तो संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आइसोलेशन अनुवर्ती रणनीति बनाने की आवश्यकता है। यह आगे भविष्य में संकेंद्रित परीक्षण प्रयासों और संभावित रेड ज़ोन निर्धारित करने में सहायक हो सकता है।

कार्ययोजना

राष्ट्रव्यापी पैमाने पर एक महामारी से लड़ने की कुंजी वायरस के साथ चूहे बिल्‍ली का खेल खेलने के बजाय रेड ज़ोन, हॉटस्पॉट्स और अग्रिम रोकथाम कार्यों का एक पूर्ववर्ती पूर्वानुमान है। हमारे विश्लेषण का अनुमान है कि भारत में कोविड-19 मामलों की वास्तविक संख्या वर्तमान में देखी गई संख्या की तुलना में काफी अधिक है। प्रत्येक राज्य और समग्र रूप से भारत के लिए मामलों की वास्तविक संख्या के हमारे अनुमानों के आधार पर हमारा तर्क है कि जनसंख्या के उप-वर्गों में बीमारी के प्रसार का अनुमान लगाने के लिए स्तरीकृत यादृच्छिक परीक्षण करना महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय यादृच्छिक परीक्षण के साथ, हम विपरीत पलायन कर रहे मजदूरों का दो बार यादृच्छिक परीक्षण करने का भी सुझाव देते हैं। क्षेत्रीय और दोहरे यादृच्छिक परीक्षण के परिणामों को एक अनुवर्ती रणनीति के साथ जोड़कर भविष्य के रेड जोन का पूर्वानुमान लगाना संभव है। केंद्र सरकार की कोविड-19 प्रतिक्रिया समिति, राज्य सरकारों के परामर्श से, भारत भर में संभावित रेड जोन की जानकारी का उपयोग रणनीतिक रूप से चिकित्सा संसाधनों को आवंटित करने के लिए कर सकती है। सबसे अच्छा तरीका यह है कि पूर्व तत्‍परता से कार्य किया जाए और प्रसार को घातक होने से पहले ही रोक दिया जाए।

लेखक परिचय: अंकिता गुप्ता और हर्ष पारिख अमेरिका के ड्यूक यूनिवरसिटि में पीएचडी के छात्र हैं। कुमार शुभाम विज़न इंडिया फ़ाउंडेशन के निदेशक हैं।

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