गरीबी तथा असमानता

कोविड-19 संकट ने शहरी गरीबों को कैसे प्रभावित किया है? फोन सर्वेक्षण के निष्‍कर्ष - II

  • Blog Post Date 14 मई, 2020
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Farzana Afridi

Indian Statistical Institute, Delhi Centre

fafridi@isid.ac.in

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Sanchari Roy

King’s College London

sanchari.roy@kcl.ac.uk

हालांकि कई टिप्पणीकारों ने चल रहे कोविड- 19 संकट के कारण प्रवासियों की दुर्दशा को उजागर किया है, परंतु शहरी झुग्‍गी-झोंपडी बस्तियों में रह रहे कम आय वाले परिवारों के बारे में कम ही ज्ञात है। अफरीदी, ढिल्लों एवं रॉय ने 24 मार्च को कोविड लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में परिवारों के यादृच्छिक प्रतिदर्श के बीच, उनकी आजीविका और शारीरिक एवं भावनात्मक कल्याण पर प्रभाव का आकलन करने के लिए 3 अप्रैल को फोन-सर्वेक्षण करना शुरू किया। हाल ही के अपने नोट में, शोधकर्ताओं ने लॉकडाउन की प्रारंभिक, अधिक कठोर अवधि ( 3 से 19 अप्रैल) के निष्कर्षों पर चर्चा की। इस अनुवर्ती नोट में, वे प्रतिबंधों में कुछ रियायतों के साथ लागू लॉकडाउन के दूसरे चरण (20 अप्रैल से 3 मई) के निष्कर्षों की रिपोर्ट करते हैं।

 

हमारे उत्तरदाताओं (जो दिल्ली के पांच जिलों में से लगभग 1,500 परिवारों का एक यादृच्छिक नमूना हैं) के सर्वेक्षण की तारीखों को यादृच्छिक रूप से चुना गया था। इसलिए, पहले चरण में जिन उत्तरदाताओं का साक्षात्‍कार लिया गया था उनमें से अधिकतर उत्तरदाताओं की सामाजिक एवं आर्थिक विशेषताएं उन उत्‍तरदाताओं के समान ही थीं जिनका साक्षात्‍कार हमने दूसरे चरण में, 19 अप्रैल के बाद लिया था। इससे हमें पहले और दूसरे चरण में प्रतिदर्शों के अनुभवों की तुलना करने और लॉकडाउन की पूरी अवधि के दौरान उनकी प्रतिक्रियाओं में अंतर का पता लगाने में सफल होते हैं।

लॉकडाउन के पहले महीने (3 अप्रैल से 3 मई) में उनकी कमाई और आय पर क्या प्रभाव पड़ा है? इन शहरी समूहों में कम आय वाले परिवारों को भोजन और नकद हस्तांतरण के माध्यम से नीतिगत प्रतिक्रियाएं लॉकडाउन के शुरुआती चरण की तुलना में बेहतर हुई हैं? क्या महिलाओं और पुरुषों को शुरुआती दिनों की तुलना में लॉकडाउन के विस्तार के बाद अधिक तनाव हुआ है? क्या सरकार की स्वास्थ्य संचार रणनीति सामाजिक दूरी और स्वच्छता प्रक्रियाओं को बनाए रखने में प्रभावी है?

19 अप्रैल तक के सर्वेक्षण के आंकड़ों में 456 परिवारों की प्रतिक्रिया शामिल थी, और 20 अप्रैल से 3 मई के बीच 931 परिवारों की। पूरी अवधि के दौरान हमारे संयुक्त प्रतिदर्श में 1,387 परिवारों में महिलाएं और पुरुष शामिल हैं।

क्या लॉकडाउन के दौरान बेरोजगारी तथा कमाई की स्थिति बदतर हो गई है?

कुल मिलाकर, हमारे सर्वेक्षण से ज्ञात होता है कि इन परिवारों की आजीविका और मजदूरी कमाने में बड़े पैमाने पर झटका लगा है। आशानुरूप, इन आवासीय क्षेत्रों में बहुत बड़ी संख्‍या में श्रमिक (90% पुरुष) काम करने में पूरी तरह से असमर्थ हैं, और समय के साथ यह स्थिति आसान नहीं हुई है, जैसा कि दूसरे चरण में प्रतिक्रियाओं से यह ज्ञात हुआ है, जबकि इसे कुछ रियायतों के साथ लागू किया गया है। लगातार, लगभग 85% उत्तरदाताओं ने अपने मुख्य व्यवसाय से कोई आय अर्जित नहीं किया है। पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण में मजदूरी प्राप्‍त न होने के अनुपात की 12 प्रतिशत अधिक होने की जानकारी मिली है।

आकृति 1. आजीविका और कमाई

नोट: समग्र प्रतिदर्श, 3 अप्रैल से 3 मई की अवधि को सम्मिलित करता है। पहला चरण, 3 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है, और दूसरा चरण, 20 अप्रैल-3 मई के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है। सभी उत्तरदाताओं के लिए संदर्भ अवधि 25 मार्च से सर्वेक्षण की तारीख तक थी।

आकृति में दिए गए अंग्रेजी वाक्‍यों/शब्‍दों का हिंदी अर्थ:

Not worked at all - बिल्‍कुल काम नहीं किया

Not earned any income - कोई आय अर्जित नहीं की

Not received full March salary - मार्च का पूरा वेतन नहीं मिला

Overall - समग्र

Phase 1 - पहला चरण

Phase 2 - दूसरा चरण

पहले चरण (9%) की तुलना में दूसरे चरण में बेरोजगारी की सूचना देने वालों का एक बड़ा हिस्सा आकस्मिक श्रमिकों (20%) का है। इस प्रकार, आजीविका के नुकसान के संदर्भ में, मजदूरी करने वाले मजदूर (उदाहरण के लिए, जो एक विशिष्ट क्षेत्र जैसे विनिर्माण में कार्यरत हैं) और अनियत मजदूर (एक विशिष्ट क्षेत्र से जुड़े दैनिक मजदूर) अब तक सबसे अधिक प्रतिकूल (45%) रूप से प्रभावित हुए हैं, उसके बाद अनौपचारिक क्षेत्र में स्व-नियोजित (31%) लोग हैं। उन लोगों में से जो 24 मार्च से पहले नियोजित थे और लॉकडाउन के बाद उन्‍होंने कुछ दिन काम करने की सूचना दी थी, दोनों चरणों में पूरे प्रतिदर्श के लिए उनकी दैनिक आय में 77% - औसत रुपये 373 से रुपए 87 प्रति दिन की गिरावट आई है।

आकृति 2. बेरोजगारी का वितरण

नोट: समग्र प्रतिदर्श, 3 अप्रैल से 3 मई की अवधि को सम्मिलित करता है। पहला चरण, 3 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है, और दूसरा चरण, 20 अप्रैल-3 मई के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है। सभी उत्तरदाताओं के लिए संदर्भ अवधि 25 मार्च से सर्वेक्षण की तारीख तक थी।

आकृति में दिए गए अंग्रेजी वाक्‍यों/शब्‍दों का हिंदी अर्थ:

Wage and casual labor - अनियत मजदूर; Self-employed - स्‍व-नियोजित

Salaried - वेतनभोगी; Overall - समग्र

Phase 1 - पहला चरण; Phase 2 - दूसरा चरण

सर्वेक्षण में शामिल कई उत्तरदाताओं ने अस्थायी झटकों को सहने के लिए दोस्तों और परिवार पर भरोसा किया। हमने उनकी नौकरी खोने के बारे में उनके सामाजिक समूह में पूछा क्योंकि अन्यथा यह संभवतः उन्‍हें अधिक तनाव देगा। 77% ने नौकरी खोने की सूचना अपने परिवार को दी और 72% से अधिक ने दोस्तों और रिश्तेदारों के समूह के भीतर यह सूचना दी। पहले चरण (66%) की तुलना में दूसरे चरण (74%) में अधिक उत्तरदाताओं ने नौकरी खोने की सूचना अपने सामाजिक समूह (परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों) के भीतर दी। अधिकांश उत्तरदाताओं ने यह मानना जारी रखा कि उनकी नौकरी अस्‍थायी रूप से गई है, लेकिन ऐसे लोगों के अनुपात में वृद्धि हुई है जिन्‍होंने अपने सामाजिक समूह में यह सूचना दी है कि वे मानते हैं कि उनकी नौकरी स्‍थायी रूप से चली गई है – ऐसे लोगों की संख्‍या पहले चरण में 14% थी जबकि दूसरे चरण में 27% हो गई, इससे यह इंगित होता है कि जैसे-जैसे लॉकडाउन की अवधि में वृद्धि हुई, वैसे-वैसे अधिक श्रमिक, बेरोजगारी को नौकरी के स्‍थायी रूप से चले जाने के रूप में देखते हैं।

क्या मनोवैज्ञानिक तनाव की स्थिति बदतर हो गई है?

इस अवधि में और चरणों के दौरान वित्तीय चिंताएं पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए तनाव का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। हम पाते हैं कि पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, अवसाद और व्‍यग्रता, तथा नींद में गड़बड़ी में वृद्धि हुई है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक तनाव प्रदर्शित होना जारी रहा है।

आकृति 3. भावनात्मक कल्याण

नोट: समग्र प्रतिदर्श, 3 अप्रैल से 3 मई की अवधि को सम्मिलित करता है। पहला चरण, 3 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है, और दूसरा चरण, 20 अप्रैल-3 मई के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है। सभी उत्तरदाताओं के लिए संदर्भ अवधि 25 मार्च से सर्वेक्षण की तारीख तक थी। प्रतिक्रिया सर्वेक्षण के दिन दर्ज की जाती है।

आकृति में आए अंग्रेजी वाक्‍यों/शब्‍दों का हिंदी अर्थ:

Financial stress - वित्‍तीय तनाव; Health stress - स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी तनाव;

Depressed - अवसादग्रस्त; Anxious/Nervous - चिंतित/बेचैन;

Unable to sleep - सो नहीं पाना; Women - महिलाएं;

Men - पुरुष; Overall - समग्र;

Phase 1 - पहला चरण; Phase 2 - दूसरा चरण

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में रोकथाम बढ़ेंगी, मानसिक कठिनाई की संभावना भी बढ़ेगे। यह, चल रही महामारी का एक गहरा उपेक्षित पहलू है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे श्रमिकों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है, और आर्थिक संकट जारी रहने या अधिक खराब हो जाने पर यह स्थिति बदतर हो सकती है।

क्या जन सहायता संबंधी आउटरीच में सुधार हुआ है?

लॉकडाउन के दौरान पचास प्रतिशत उत्तरदाताओं ने किसी प्रकार का सहयोग या सहायता प्राप्त करने की सूचना दी है, जो पहले चरण में लगभग 47% की तुलना में वृद्धि दिखाता है। परिवारों को जो सहायता प्राप्‍त हुईं उनमें मुख्‍य रूप से खाद्य और किराने के सामान के रूप में प्राप्‍त होने वाली सरकारी सहायता का बड़ा योगदान रहा, जिसका हिस्‍सा लगभग 90% है। हालांकि, भोजन और आवश्यक वस्‍तुओं की अपर्याप्‍तता की सूचना देने वाले उत्तरदाताओं का अनुपात भी 34% से बढ़कर 43% हो गया है, और अपर्याप्त सरकारी सहायता की सूचना देने वाले लोगों का अनुपात दोनों चरणों के बीच थोड़ा अधिक यानि 70 से 73 प्रतिशत हो गया है। इस प्रकार, भले ही सरकार की पहुंच में सुधार हुआ है, लेकिन या तो चूंकि उत्तरदाताओं की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं या सहायता की उपलब्धता के बारे में उनकी जागरूकता बढ़ी है - सहायता की अपर्याप्तता की सूचना दिए जाने में भी वृद्धि हुई है। आशाजनक बात यह है कि समय के साथ चिकित्सा सहायता में सुधार की जानकारी मिली है, जैसा कि दूसरे चरण में प्रतिक्रिया द्वारा दिखाया गया है।

आकृति 4. सरकार और अन्‍य सहायता

नोट: समग्र प्रतिदर्श, 3 अप्रैल से 3 मई की अवधि को सम्मिलित करता है। पहला चरण, 3 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है, और दूसरा चरण, 20 अप्रैल-3 मई के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है। सभी उत्तरदाताओं के लिए संदर्भ अवधि 25 मार्च से सर्वेक्षण की तारीख तक थी। प्रतिक्रिया सर्वेक्षण के दिन दर्ज की जाती है।

आकृति में आए अंग्रेजी वाक्‍यों का हिंदी अर्थ:

Insufficient food & other essentials - अपर्याप्‍त भोजन एवं अन्‍य आवश्‍यक वस्‍तुएं

Inadequate govt. assistance - अपर्याप्‍त सरकारी सहायता

Inadequate medical help - अपर्याप्‍त चिकित्‍सीय सहायता

Overall - समग्र

Phase 1 - पहला चरण

Phase 2 - दूसरा चरण

क्या यहां सामाजिक दूरी और व्‍यक्तिगत स्वच्छता प्रक्रियाओं का कोई स्‍थान है?

इसका बहुत भारी और चिंताजनक उत्‍तर है - ‘नहीं’! सामाजिक संपर्क से बचने और व्यक्तिगत स्वच्छता के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य प्रक्रियाओं का स्‍तर ऊपर तो नहीं गया है, पर यह और नीचे जा सकता है। यह सामाजिक समारोहों के लिए विशेष रूप से सत्‍य है, जिसके दूसरे चरण में होने की अधिक संभावना है। इन आवासीय स्थानों में जनसंख्या के उच्च घनत्व की निश्चितता को देखते हुए, यह स्‍वाभाविक है कि लंबे समय तक शारीरिक दूरी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है और जैसे-जैसे हम लॉकडाउन में आगे बढ़ते हैं इसके और कम होने की संभावना है। लॉकडाउन में छूट मिलने और सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने पर संक्रमण दर में वृद्धि की संभावना है, इस आबादी को स्वास्थ्य और आपसी दूरी बनाए रखने के बारे में शिक्षित और संवेदनशील बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता है।

आकृति 5. सामुदायिक स्वास्थ्य प्रक्रियाएं

नोट: समग्र प्रतिदर्श, 3 अप्रैल से 3 मई की अवधि को सम्मिलित करता है। पहला चरण, 3 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है, और दूसरा चरण, 20 अप्रैल-3 मई के बीच, सर्वेक्षण किए गए उत्तरदाताओं को संदर्भित करता है। सभी उत्तरदाताओं के लिए संदर्भ अवधि 25 मार्च से सर्वेक्षण की तारीख तक थी। प्रतिक्रिया सर्वेक्षण के दिन दर्ज की जाती है।

आकृति में आए अंग्रेजी वाक्‍यों/शब्‍दों का हिंदी अर्थ:

No social gatherings - कोई सामाजिक समारोह नहीं

Keep physical distance - शारीरिक दूरी रखना

Wash hands frequently - बार-बार हाथ धोना

Women - महिलाएं

Men - पुरुष

Overall - समग्र

Phase 1 - पहला चरण

Phase 2 - दूसरा चरण

सकारात्मक पक्ष के रूप में, प्रतिदर्श के केवल 14% लोगों ने लॉकडाउन के बाद मुख्य रूप से केवल बुखार, बुखार एवं खांसी, केवल खांसी के लक्षणों के संयोजन के साथ बीमार होने के बारे में बताया। लगभग 3% लोग अपने इलाके के कोविड-19 पॉजिटिव मामलों के बारे में जानते थे।

जबकि हमारे प्रतिदर्श में कोविड-19 के कथित शारीरिक प्रभाव (खराब स्वास्थ्य के संदर्भ में) कम प्रतीत होता है और समय के साथ 10% से 14% तक मामूली बढ़ जाता है, लंबे रोकथाम और कुछ प्रतिबंधों को कम करने के बावजूद इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बहुत अधिक रहता है, जो और बिगड़ गया है (कुछ मापदंडों के लिए 10-11 प्रतिशत अंक तक)।

हमारे निष्कर्ष स्वास्थ्य के झटके की कम दर लेकिन वित्तीय कठिनाई, चिंता और मनोवैज्ञानिक संकट की ऊंची दर की सूचना देते हैं, जिनके सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों में छूट दिए जाने के बाद भी जारी रहने की संभावना है। स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण के बीच तुलना की जाए तो हमारे सर्वेक्षण से पता चलता है कि शहरी गरीबों के बीच आर्थिक कल्‍याण का मुद्दा अधिक महत्‍वपूर्ण है। आज इन परिवारों को मूल रूप से जन स्‍थानांतरणों के माध्यम से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है, जिसको कम करना दीर्घावधि में आर्थिक और मनोवैज्ञानिक संकट को रोकने के लिए आवश्यक है।

लेखक परिचय: फ़रज़ाना अफरीदी भारतीय सांख्यिकी संस्थान दिल्ली के अर्थशास्त्र एवं योजना विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। अमृता ढिल्लों किंग्स कॉलेज लंदन में राजनीतिक अर्थव्यवस्था विभाग में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं। संचारी रॉय किंग्स कॉलेज लंदन में विकास अर्थशास्त्र में वरिष्ठ व्याख्याता (एसोसिएट प्रोफेसर) हैं।

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