Main Banner Image

भारत के तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण का महिलाओं के सशक्तिकरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?

माना जाता है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को उनके ग्रामीण समकक्षों की तुलना में अधिक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अवसर और स्वतंत्रता प्राप्त होती है। साथ ही, शोध से यह पता चलता है कि शहरी वा...

  • लेख

संख्याओं से प्रभाव तक : राजस्थान के प्रभावी डेटा प्रबंधन से सीख

नीति निर्धारण में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के लिए अच्छे डेटा का होना महत्वपूर्ण होता है। इस लेख में, संतोष और कपूर ने विकासात्मक चुनौतियों से सम्बंधित डेटा एकत्रित करने, उसे साझा करने और उसका उपयोग ...

  • फ़ील्ड् नोट

माध्यमिक स्तर के अधिगम में सुधार : रेमिडियल शिविरों और कक्षा में शिक्षकों के लचीलेपन की भूमिका

भारतीय शिक्षा प्रणाली की एक प्रमुख दुविधा यह है कि बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं, लेकिन वास्तव में ढ़ंग से सीख नहीं रहे हैं। यह लेख ओडिशा में हुए एक प्रयोग के आधार पर, माध्यमिक विद्यालय में अधिगम की कमी के...

  • लेख
इनके द्वारा सूची स्पष्ट करें :
--कृपया चुने--
--कृपया चुने--

हिमाचल की शहरी रोजगार गारंटी योजना की जांच

भारत में अर्थशास्त्रियों द्वारा शहरी रोजगार कार्यक्रम की आवश्यकता के बारे में दिए गए सुझावों के बावजूद, इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर की नीति के अमल में आने में कुछ और समय लगेगा। हालांकि, कुछ राज्यों ने...

  • फ़ील्ड् नोट

आरबीआई के कार्य (और वक्तव्य) कैसे वित्तीय बाजारों को प्रभावित करते हैं

विकसित देशों में उनके केंद्रीय बैंक द्वारा घोषित नीतिगत दरों में अप्रत्याशित परिवर्तन के चलते वित्तीय बाजारों को लगने वाले मौद्रिक झटके के प्रति पर्याप्त प्रतिक्रिया दर्शाने के लिए जाना जाता है। यह ले...

  • लेख

व्यापार, आंतरिक प्रवास और मानवीय पूंजी: भारत में आईटी में तेजी का फायदा किसे हुआ

भारतीय अर्थव्यवस्था में 1993-2004 के दौरान व्यापार में विस्तार हुआ और आईटी में तेजी आई। कुछ चुनिंदा बड़े शहरों में केंद्रित उच्च कौशल-गहन क्षेत्र में हुए शानदार विकास ने देश भर में असमानता को कैसे प्र...

  • लेख

भारत में कोविड-19: मामले, मौतें और टीकाकरण

भारत में कोविड-19 की तीसरी बड़ी लहर के रूप में इसके ओमाइक्रोन वेरिएंट का प्रसार हुआ है, जिसमें मामलों की संख्या तो दूसरी लहर से अधिक है, लेकिन इससे बीमारी का खतरा औसतन कम गंभीर रहा है। इस लेख में, कुं...

  • दृष्टिकोण

भारतीय कानून कितना औपनिवेशिक है?

भारत में औपनिवेशिक शासन और इसकी कार्यप्रणालियों से संबंधित आलोचनाओं के चलते कई प्रसंगों में इसके साथ कानून जोड़े गए हैं, ताकि औपनिवेशिक विरासत की दासत्वपूर्ण परंपरा में परिवर्तन लाया जा सके। इस लेख में...

  • लेख

जलवायु संकट में भारत की संघीय प्रणाली की पुनर्कल्पना

सभी देशों की तरह भारत के लिए भी, जलवायु परिवर्तन एक अत्यंत तेजी से बढती समस्या बन गई है। इस लेख के जरिये पिल्लई एवं अन्य तर्क देते हैं कि इस समस्या के समाधान के लिए भारत की संघीय प्रणाली की पुनर्कल्पन...

  • दृष्टिकोण

महामारी के समय में बजट और राजनीति

हाल ही में वर्ष 2022-23 के लिए घोषित बजट को राजनीतिक अर्थव्यवस्था के चश्मे से देखते हुए, यामिनी अय्यर तर्क देती हैं कि महामारी के दौरान घोषित किये गए दोनों बजटों में कल्याण से ज्यादा पूंजीगत व्यय पर द...

  • दृष्टिकोण

बजट 2022-23: सफलताएं एवं चूक

वर्ष 2022-23 के बजट की सफलताएं एवं चूक को रेखांकित करते हुए, राजेश्वरी सेनगुप्ता यह तर्क देती हैं कि सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देना एक सही दिशा में कदम प्रतीत होता है, जबकि संरक्षणवाद पर निर...

  • दृष्टिकोण

बजट 2022-23: क्या सार्वजनिक निवेश पर आधारित विकास रणनीति वांछनीय और विश्वसनीय है?

सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात के रूप में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाने की इच्छा रखते हुए वर्ष 2022-23 के बजट में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस संदर्भ में, आर. नाग...

  • दृष्टिकोण

बजट 2022-23: समस्याएँ तथा युक्तियां

भारत के 2022-23 के केंद्रीय बजट का विश्लेषण करते हुए, नीरज हाटेकर तर्क देते हैं कि मनरेगा, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जिसे 2021-22 के बजट अनुमानों की तुलना में अतिरिक्त धन प्राप्त नहीं हुआ है, क...

  • लेख

बजट 2022-23: पूंजीगत लाभ कर, और परिसंपत्ति-मूल्य

परिसंपत्ति-मूल्य स्थिरता को सुनिश्चित कराने की आवश्यकता होते हुए भी, वर्ष 2022-23 के बजट में इक्विटी निवेश पर पूंजीगत लाभ कर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इस लेख के ज़रिये, गुरबचन सिंह संपत्ति-मूल...

  • दृष्टिकोण

कोविड-19 और दीर्घकालिक गरीबी: ग्रामीण राजस्थान से साक्ष्य

प्रारंभिक गणना के आधार पर, भारत में कोविड-19 के कारण 7.7 से 22 करोड़ लोग गरीबी में आ गए हैं, जिसके अनुसार अब शहरी आबादी में गरीब 60% और ग्रामीण आबादी में 70% हो गए हैं। वर्ष 2002 में ग्रामीण राजस्थान म...

  • लेख