मानव विकास

कोविड-19 टीके के बारे में झिझक: राज्यों में समय के साथ रुझान

  • Blog Post Date 05 मई, 2021
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Soumi Roy Chowdhury

National Council of Applied Economic Research

srchowdhury@ncaer.org

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Abhinav Motheram

National Council of Applied Economic Research

amotheram@ncaer.org

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Santanu Pramanik

National Council of Applied Economic Research

spramanik@ncaer.org

कोविड-19 के टीके की उपलब्धता के बावजूद इसे स्‍वीकार या अस्‍वीकार करने में देरी, दुनिया भर में आबादी को इष्टतम टीकाकरण कवरेज प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है। इस लेख में यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड और कार्नेगी मेलन की साझेदारी मे किए गए एक फेसबुक सर्वेक्षण के डेटा का उपयोग करते हुए भारत में राज्यवार वैक्सीन संबंधी झिझक एवं समय के साथ इसके रुझानों की पड़ताल की गई है।

 

16 जनवरी 2021 को, भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें कोविड-19 के खिलाफ 130 करोड़ आबादी के टीकाकरण का प्रयास आरंभ हुआ। केंद्र सरकार की रणनीति के अंतर्गत सर्वप्रथम स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं तथा इसके बाद 1 मार्च से, 60 वर्ष से अधिक आयु एवं गंभीर बीमारियों से पीडि़त 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण किया जाना था। टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण 1 अप्रैल से शुरू हुआ जिसके अंतर्गत 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को शामिल किया गया है। अभियान के पहले चरण के दौरान, 28 फरवरी तक 3 करोड़ के लक्ष्य की तुलना में 1.1 करोड़ से कुछ अधिक लोगों का टीकाकरण किया गया, जिसमें कुछ राज्यों ने दूसरे राज्‍यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और कथित साक्ष्‍यों से पता चलता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास एवं भरोसे की कमी, टीकों की प्रभावकारिता एवं सुरक्षा संबंधी चिंताएं, और अभी तक संक्रमित नहीं होने संबंधी लापरवाही, पहले चरण में प्रमुख चुनौतियां थीं। टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण 1 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री के टीकाकरण के साथ शुरू हुआ, जो जनता में विश्वास स्थापित करने के लिए अत्‍यंत प्रभावी कदम हो सकता है।

टीका आने से पहले, अधिकांश संवाद और सार्वजनिक चर्चाएं इस बात पर केंद्रित थीं कि सरकार को आपूर्ति संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, एक विशाल जनसंख्‍या को टीका लगाने के इस बड़े अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी प्रकार की व्यवस्थाएं स्‍थापित करना सुनिश्चित किया है, जिसके अंतर्गत टीके के भंडारण की सुविधाओं को बढ़ाया जाना, पंजीकरण के लिए कोविन (Co-WIN) वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जाना, वैक्‍सीन लगाने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना तथा राज्‍यों में टीकाकरण गतिविधियों का पूर्वाभ्‍यास किया जाना शामिल है (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, 2020a)। तथापि, टीके के प्रति झिझक जैसी मांग-पक्ष संबंधी बाधाओं पर पर्याप्‍त ध्‍यान नहीं दिया गया (मैकडोनाल्ड 2015, शूस्टर एवं अन्‍य 2015)।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) द्वारा टीके के प्रति झिझक को "टीकाकरण सेवाओं की उपलब्धता के बावजूद टीकों को स्‍वीकार या अस्‍वीकार करने में देरी" के रूप में परिभाषित किया गया है, जोकि दुनिया भर में आबादी को इष्टतम टीकाकरण कवरेज प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है (लार्सन एवं अन्‍य 2018)। टीकाकरण के पहले कुछ हफ्तों में, मीडिया रिपोर्टों ने यह संकेत दिया कि तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्यों में स्वास्थ्य कर्मियों में टीके के प्रति झिझक है। कई राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय सर्वेक्षणों के बाद से इन कथित रिपोर्टों की पुष्टि हुई है (जयदेवन एवं अन्‍य 2021)।

इस लेख में, हम फेसबुक के प्रयोक्‍ताओं के एक निरंतर वैश्विक ऑनलाइन सर्वेक्षण से प्राप्‍त निष्कर्षों को दर्शाते हैं, जिसमें टीकाकरण संबंधी झिझक में समय और स्‍थान आधारित रुझान, टीका संबंधी झिझक के पीछे के कारण और भारत में कोविड-19 टीकाकरण की वास्तविक कवरेज के साथ इसके संबंध का पता लगाते हैं।

कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण: चुनौतीपूर्ण समय में एक अद्वितीय डेटा स्रोत

यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड और कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी (रेनहार्ट और टिब्शिरानी 2020)1 फेसबुक के साथ मिल कर, अप्रैल 2020 से 200 से अधिक देशों में और 50 से अधिक भाषाओं में दैनिक रूप से कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण (सीएसएस) आयोजित कर रहे हैं। दुनिया भर में फेसबुक प्रयोक्‍ताओं को इस स्वैच्छिक सर्वेक्षण में, कोविड-19 से संबंधित लक्षणों, कोविड-19 परीक्षणों संबंधी अनुभव, अन्य लोगों के साथ संपर्क, मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा, नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, टीका संबंधी झिझक और अन्य संबंधित विषयों के बारे में सवाल पूछे जाते हैं। सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों की गोपनीयता से समझौता किए बिना, इस सर्वेक्षण को कोविड-19 के प्रसार की निगरानी करने और पूर्वानुमान लगाने में मदद करने के लिए मूल्यवान जानकारी के लिये डिजाइन किया गया है। फेसबुक सर्वेक्षण के उत्तरदाताओं की पृष्ठभूमि की जानकारी2 को अध्ययन के अकादमिक भागीदारों के साथ साझा नहीं करता है, और बदले में, अका‍दमिक भागीदार व्यक्तिगत सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं को फेसबुक के साथ साझा नहीं करते हैं।

सीएसएस डेटा भारत में टीका संबंधी झिझक में समय और स्‍थान आधारित भिन्नता का पता लगाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। भारत ने घरेलू सर्वेक्षणों के लिए पारंपरिक रूप से व्‍यक्तिगत डेटा संग्रह पर विश्‍वास किया है; नमूने एकत्रित करने के विश्‍वसनीय ढांचे के अभाव में, वेब सर्वेक्षणों को आम तौर पर कम महत्‍व प्रदान किया जाता है (कूपर 2000, कूपर और मिलर 2008)। सीएसएस नमूने के ढ़ांचे के रूप में 30 करोड़ से अधिक फेसबुक सक्रिय प्रयोक्‍ता आधार (FAUB) का उपयोग करता है, जो इसे एक अनूठा लाभ देता है (कीलेरी 2020)। तथापि, चूंकि FAUB राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर सामान्य आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है, इसलिए डेटासेट में प्रत्‍येक उत्‍तरदाता के लिए एक सर्वेक्षण भार शामिल होता है ताकि सीएसएस नमूने के आधार पर लक्षित जनसंख्या के स्तर पर अनुमान लगाने के लिए किसी भी भारित विश्लेषण का उपयोग किया जा सके (बार्के एवं अन्‍य 2020)। भारत में यह सर्वेक्षण 23 अप्रैल 2020 को शुरू किया गया था और 27 फरवरी 2021 तक 15 लाख से अधिक लोगों का साक्षात्कार लिया जा चुका है, तथा यह कार्य अभी भी जारी है। सर्वेक्षण में समय-समय पर नए प्रश्नों को शामिल कर इसे संशोधित किया जाता है। टीकाकरण संबंधी प्रश्‍न 21 दिसंबर 2020 से पूछे जाने लगे थे और उसके बाद इन्‍हें दैनिक रूप से पूछा जा रहा है। हम टीकाकरण के बारे में सवालों पर 27 फरवरी 2021 तक फेसबुक प्रयोक्‍ताओं से प्राप्‍त 277,844 प्रतिक्रियाओं पर अपने विश्लेषण को आधार बनाते हैं।

टीका संबंधी झिझक किस हद तक है?

राष्ट्रीय स्तर पर कुल भारित अनुमानों से पता चलता है कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 45% ने बताया कि यदि सर्वेक्षण के दिन टीका उपलब्‍ध होगा तो वे निश्चित रूप से इसका चयन करेंगे, और यदि हम इसमें ‘शायद हां’ प्रतिक्रिया को भी शामिल कर लें तो यह आंकड़ा 71% तक पहुंच जाता है। बड़ी संख्‍या में लोगों (29%) ने टीक लगवाने में झिझक दिखाई। 16% से अधिक लोगों ने अनिच्छा (‘संभवतः नहीं’) दिखाई और 12% लोग टीका नहीं लेने के बारे में निश्चित थे (तालिका 1)। हमने टीका संबंधी झिझक व्यक्त करने वाले लोगों के अनुमानों को अन्‍य स्रोतों से भी देखा। 23 दिसंबर 2020 और 4 जनवरी 2021 के बीच संचालित किए गए, दिल्ली एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) कोरोना वायरस टेलीफोन सर्वेक्षण (डीसीवीटीएस) चरण 4, में अनुमान लगाया गया है कि दिल्ली एनसीआर में 39% लोगों में टीका संबंधी झिझक है। इसमें 20% वे लोग भी शामिल हैं जो टीका नहीं लगवाने के बारे में निश्चित थे।

तालिका 1. सर्वेक्षण प्रश्न: "यदि आज आपको कोविड-19 (कोरोना वायरस) से बचाव के लिए एक टीके की पेशकश की जाती है, तो क्या आप टीका लगवाना चाहेंगे?"

प्रतिक्रिया के विकल्‍प

बारंबारता

भारित प्रतिशत

निश्चित रूप से हां

100,788

45

शायद हां

61,400

26.3

शायद नहीं

38,590

16.3

निश्चित रूप से नहीं

30,081

12.4

कुल

230,859

100

स्रोत: कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण

जिन लोगों ने यह जवाब दिया कि वे निश्चित रूप से टीकाकरण नहीं करवाएंगे (यदि सर्वेक्षण के दिन की पेशकश की जाती है), सीएसएस में उनकी झिझक के पीछे के कारणों के बारे में एक प्रश्न शामिल किया गया (आकृति 1)। शीर्ष तीन प्रतिक्रियाओं में शामिल है "मैं इंतजार करना चाहता हूं और यह देखना चाहता हूं कि क्या यह सुरक्षित है और फिर बाद में लगवा सकता हूं”, "मुझे लगता है कि मेरे बजाय अन्य लोगों को इसकी अधिक जरूरत है", और "मैं कोविड-19 टीके के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में चिंतित हूं”। तथापि, बढ़ती हुई अनिच्छा के संबंध में आशा की एक किरण यह हो सकती है कि प्रतिक्रियाओं से संकेत मिलता है कि यद्यपि वे लोग सर्वेक्षण के समय टीका लगाने के लिए तैयार नहीं थे, परंतु सुरक्षा एवं टीके की प्रभावकारिता और टीकाकरण के बाद इसके प्रतिकूल प्रभाव में कमी के साक्ष्‍य की शर्त पर वे निकट भविष्य में टीका लगवाने का विकल्प चुन सकते हैं।

आकृति 1. कोविड-19 टीका 'निश्चित रूप से नहीं' लेने के लिए बताए गए कारण

आकृति में आए अंग्रेजी वाक्‍यांशों का हिंदी अर्थ

It is against my religious beliefs: यह मेरे धार्मिक मान्‍यताओं के खिलाफ है

Concerned about the cost: इसकी कीमत के बारे में चिंता है

Don’t like vaccines: टीके पसंद नहीं हैं

Don’t know if vaccine will work: पता नहीं कि टीका कारगर होगा या नहीं

Other reason: अन्‍य कारण

Don’t believe I need one: मुझे लगता है कि मुझे इसकी जरूरत नहीं है

Concerned about possible side effects: इसके संभावित दुष्‍प्रभावों के बारे में चिंता है

Other people need it more than I do right now: अभी मेरे बजाय अन्‍य लोगों को इसकी ज्‍यादा जरूरत है

Plan to wait & see it is safe: इंतजार करेंगे और देखेंगे कि यह सुरक्षित है या नहीं

स्रोत: कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण

टिप्‍पणियां : (i) इस आंकड़े में वे उत्तरदाता शामिल हैं जो निश्चित रूप से सर्वेक्षण के दिन (N=8,405) टीका नहीं लेना चाहते थे। (ii) यह प्रश्न 6 फरवरी 2021 को सीएसएस में शामिल किया गया था।

टीका संबंधी झिझक में स्थान आधारित भिन्नता

इसके बाद, हम भारत में राज्यों में टीका संबंधी झिझक की मौजूदगी का अनुमान लगाकर इस बारे में स्थान आधारित भिन्नता का पता लगाते हैं। नीचे दी गई आकृति 2 से, यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा तथा आंध्र प्रदेश राज्‍यों में टीका संबंधी झिझक सबसे अधिक है। दूसरी ओर, केरल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में यह झिझक कम है।

आकृति 2. भारत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टीका संबंधी झिझक

स्रोत: कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण डेटा।

टिप्‍पणियां: (i) टीका लगवाने की अनिच्छा (अनिश्चितता) ‘शायद नहीं’ और ‘निश्चित रूप से नहीं’ प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। (ii) विभिन्न राज्यों के लिए नमूनों के आकार कोष्ठक में दिए गए हैं।

टीका संबंधी झिझक में समय के अनुसार रुझान

चूंकि सीएसएस प्रश्नावली में टीका संबंधी झिझक के बारे में प्रश्‍नों को 21 दिसंबर 2020 को जोड़ा गया था और उसके बादे से ये प्रश्‍न सर्वेक्षण का हिस्सा बने रहे, इसलिए हमने चुनिंदा राज्यों में टीका संबंधी झिझक के बारे में समय के अनुसार रुझान का पता लगाया। हमने भारत के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित राज्यों के लिए टीका संबंधी झिझक के बारे में सात-दिवसीय चल औसत की गणना की। इसमें वे राज्य शामिल हैं जिन्होंने टीकाकरण के बारे में सबसे अधिक (तमिलनाडु) और सबसे कम (केरल) झिझक की सूचना दी है।

आकृति 3 यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात जैसे राज्यों में टीका संबंधी झिझक समय के साथ कम हो रही है जबकि दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश में, और कुछ हद तक तमिलनाडु में, झिझक का स्तर समय के साथ बढ़ता जा रहा है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, और तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में यह देखा गया कि जब भारत में 16 जनवरी 2021 को टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था, उस समय वहां झिझक में तेजी से कुछ वृद्धि हुई।

आकृति 3. भारत के चुनिंदा राज्‍यों में समय के अनुसार टीका संबंधी झिझक के रुझान

स्रोत: कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण

नोट: झिझक को 'शायद नहीं' और 'निश्चित रूप से नहीं' प्रतिक्रियाओं के आधार पर परिभाषित किया गया है।

टीका संबंधी झिझक और टीकाकरण के वास्तविक स्तर के बीच संबंध

हमने यह पता लगाया कि टीकाकरण अभियान के पहले चरण में वास्तविक टीकाकरण कवरेज पर टीका संबंधी झिझक का क्‍या प्रभाव पड़ा। राज्य-स्तरीय टीकाकरण संख्या व्यापक रूप से प्रयोग की गई वेबसाइट covid19india.org से प्राप्त की गई थी। हम वास्तविक टीकाकरण कवरेज को मापने के लिए दो अलग-अलग भाजकों3 पर विचार करते हैं: (i) आकृति 4 के बाएं पैनल में, हम राज्यों के पहले चरण के लक्षित लाभार्थियों के लिए प्रतिनिधि के रूप में 2019 के राज्य-स्तरीय जनसंख्या अनुमानों का उपयोग एक करते हैं, और (दाएं पैनल में ii), हमने राज्य-वार स्वास्थ्यकर्मियों की लक्षित जनसंख्या पर विचार किया। आकृति 4 के दोनों ग्राफ में, क्षैतिज अक्ष पर सीएसएस डेटा से प्राप्त टीका संबंधी झिझक का भारित फैलाव, और ऊर्ध्वाधर अक्ष पर क्रमशः प्रति दस लाख वास्तविक टीकाकरण संख्या और टीकाकरण कवरेज दर है। सह-संबंधात्‍मक चिन्‍हीकरण और अरेखीय प्रतिगमन फलन झिझक और वास्तविक टीकाकरण कवरेज के बीच एक नकारात्मक संबंध दर्शाते हैं।

आकृति 4. भारत के टीकाकरण अभियान के पहले चरण में टीका संबंधी झिझक और वास्तविक टीकाकरण कवरेज

स्रोत: वैक्सीन संबंधी झिझक के अनुमान कोविड-19 लक्षण सर्वेक्षण डेटा पर आधारित हैं; वास्तविक टीकाकरण संख्या covid19india.org से ली गई हैं।

टिप्‍पणियां: (i) प्लॉट में अलग-अलग रंग राज्यों की क्लस्टरिंग को इंगित करते हैं, और बिंदुओं का आकार 2019 में अनुमानित जनसंख्या के समानुपाती है। (ii) चूंकि हमारे पास केवल स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का डेटा था और आवश्यक कर्मचारियों का डेटा उपलब्‍ध नहीं था जो टीकाकरण अभियान के पहले चरण में लक्षित जनसंख्या का भी हिस्सा थे, अत: कुछ राज्यों के लिए कवरेज 100% से ऊपर है।

नीतिगत प्रभाव

किसी भी टीके की प्रभावकारिता उसके अनुमोदन प्रक्रिया की कुंजी है। टीका (टीके) के बारे में पारदर्शी और सटीक जानकारी होने से आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी और इससे जनता में प्रोत्साहन भी बढ़ेगा। स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने कोविड-19 टीके के संबंध में एक प्रभावी संचार रणनीति के चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है। नए टीकों की प्रभावकारिता और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को हल करना इन क्षेत्रों में से एक है। पारंपरिक रूप से ज्ञात टीका संबंधी झिझक वाले समूहों की पहचान करना और विश्वसनीय ‘प्रभावशाली व्‍यक्तियों’ द्वारा सामुदायिक जुड़ाव की गतिविधियों के माध्यम से उनमें विश्वास का निर्माण करना इन सुझाए गए कार्यों में शामिल है (स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय, 2020b)। इस महत्वपूर्ण कदम को पूरे प्रयास के साथ लागू करने की आवश्यकता है। सीएसएस आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि टीकाकरण में वृद्धि करने के संबंध में राजनेताओं द्वारा की जाने वाली सिफारिशों की तुलना में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अधिकारियों और सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा की जाने वाली सिफारिशों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। राज्यों में झिझक और कवरेज में असमानताएं हमें बताती हैं कि मुद्दों को संदर्भ-विशिष्ट तरीके से हल करने के लिए राज्य-स्तरीय लक्षित उपायों की आवश्यकता है। टीकाकरण के बारे में भ्रम और झिझक को दूर करने के लिए प्रभावी संचार के माध्‍यम से विश्‍वास का निर्माण करना सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण है।

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टिप्पणियाँ:

  1. 1. दोनों विश्वविद्यालयों ने सर्वेक्षण को डिजाइन करने के लिए व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य समुदाय के साथ सहयोग किया।
  2. वह जानकारी जो किसी प्रयोक्‍ता की प्रोफ़ाइल का हिस्सा थी, लेकिन सर्वेक्षण का हिस्सा नहीं थी।
  3. आदर्श रूप से, कोविड-19 टीकाकरण कवरेज दर की गणना करने के लिए भाजक के रूप में लाभार्थियों (स्वास्थ्य कार्यकर्ता और आवश्यक कर्मचारी) की अनुमानित संख्या का उपयोग किया जाएगा। तथापि, प्रत्येक राज्य के लिए स्वास्थ्य कर्मियों और आवश्यक कर्मचारियों के बारे में विश्वसनीय आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं।

लेखक परिचय: सोमी रॉय चौधरी नैशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (इंडिया) (NCAER) में एसोसिएट फेलो हैं। अभिनव मोथेराम नैशनल डेटा इनोवेशन सेंटर, नैशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एनालिस्ट हैं। सांतनु प्रमाणिक नैशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च में सीनियर फेलो हैं और नैशनल डेटा इनोवेशन सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर हैं।

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