सामाजिक पहचान

क्या महिला राजनेता आर्थिक विकास के लिए अच्छी होती हैं?

  • Blog Post Date 18 अप्रैल, 2019
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Sonia Bhalotra

University of Essex

srbhal@essex.ac.uk

विगत दो दशकों के दौरान वैश्विक स्तर पर राजनीति में महिलाओं के अनुपात में असाधारण वृद्धि हुई है, लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इससे आर्थिक प्रदर्शन पर कैसा प्रभाव पड़ता है। इस लेख में भारत में राज्य विधान-सभाओं के प्रतिस्पर्धी चुनावों के आंकड़ों का उपयोग करके इसकी जांच-परख की गई है। इसमें पता चलता है कि महिलाओं को चुनने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में पूरे कार्यकाल में पुरुषों को चुनने वाले निर्वाचन क्षेत्रों की अपेक्षा आर्थिक गतिविधियों की विकास दर काफी अधिक दिखती है।

 

विगत दो दशकों के दौरान सौ से भी अधिक देशों में महिलाओं के लिए संसद या दलों की सूचियों में कोटा शुरू किया गया है (बेस्ली एवं अन्य 2013, दह्लरुप 2006)। पिछले 20 वर्षों में पूरी दुनिया के संसदो में महिलाओं का प्रतिशत दोगुने से भी अधिक हो गया है जो जून 2016 में 22.8 प्रतिशत था। राजनीति का नारीकरण हमारे समय की सर्वाधिक उत्साहवर्धक राजनीतिक परिघटनाओं में से एक है। इसके बावजूद, हमें यह नहीं मालूम है कि विकास के लिए यह कैसा संकेत देता है।

अध्ययन: महिला विधायक और आर्थिक प्रदर्शन

इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर (आइजीसी) के हाल के शोध में मैंने और मेरे सह- लेखकों ने इस बात की पहली व्यवस्थित जांच के लिए कि महिला राजनेता आर्थिक विकास के लिए अच्छी होती हैं या नहीं, भारत से प्राप्त व्यापक आंकड़ों का उपयोग किया है (बास्करन एवं अन्य 2018)। पुनर्वितरणमूलक राजनीति और अधिक करों के प्रति सहनशीलता के साथ महिलाओं का जुड़ाव (एडलुंड एवं अन्य 2002, 2005; कैंपबेल 2004) इस बात को विश्वसनीय बनाता है कि कम से कम अल्पावधि से लेकर मध्यम अवधि में तो महिला राजनेता विकास को बढ़ावा देने के मामले में पुरुषों से कम प्रभावी होती हैं।

विधायक के जेंडर और आर्थिक प्रदर्शन के बीच संबंध पर बुनियादी साक्ष्य की कमी में संभवतः दो कारकों की भूमिका होती है। पहली यह कि आर्थिक गतिविधि पर निर्वाचक क्षेत्र स्तर के आंकड़े अधिकांश देशों में उपलब्ध नहीं हैं। पूर्व में अनेक देशों से प्राप्त साक्ष्यों को अच्छे प्रतिनिधि के बतौर मानते हुए हमलोगों ने आर्थिक प्रदर्शन के पैमाने के रूप में रात्रिकालीन प्रकाश के उपग्रहों द्वारा लिए गए चित्रों का उपयोग किया है (हेंडरसन एवं अन्य 2012, चेन एवं अन्य 2011)। हमलोगों ने पुष्टि की है कि इसका राज्य स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ गहरा सहसंबंध है, और इसके बाद हमने निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर इसकी मैपिंग की है। शोध में बुनियादी साक्ष्य उपलब्ध कराने के प्रयास में दूसरी बाधा यह है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिलाएं चुनाव जीतती हैं उनका रुझान कई तरह से व्यवस्थित रूप से भिन्न होगा जिसका आर्थिक प्रदर्शन के साथ सहसंबंध हो सकता है।

विधायक के जेंडर की भूमिका को मतदाताओं की पसंद से अलग करने के लिए हमने पुरुषों और महिलाओं के बीच हुए नजदीकी मुकाबले वाले चुनावों के एक सैंपल में रिग्रेशन डिस्कंटिन्यूइटी डिजाइन नामक सांख्यिकीय दृष्टिकोण का उपयोग किया है (ली 2008)। इसमें इस बात पर विश्वास किया गया है कि भारत में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट के आधार पर चुनाव होते हैं जिसमें ‘विजेता को सबकुछ प्राप्त’ हो जाता है जिससे दूसरे से एक मत अधिक प्राप्त करने वाला प्रत्याशी जीत जाता है। नजदीकी मुकाबले वाला चुनाव उसे कहा जाता है जिसमें विजेता और दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को प्राप्त मतों में कम अंतर रहता है। विश्लेषण वाले सैंपल से हमने उन सारे निर्वाचन क्षेत्रों को हटा दिया जहां पर महिलाओं ने चुनाव नहीं लड़ा है। उसके बाद हमने महिलाओं द्वारा पुरुषों पर कम अंतर से जीत हासिल करने वाले निर्वाचन क्षेत्रों (ट्रीटमेंट) की तुलना उन निर्वाचन क्षेत्रों से की है जहां पुरुषों ने महिलाओं पर कम अंतर से जीत हासिल की है (कंट्रॉल)। वैलिडिटी चेक (जो हमने किए हैं) के आधार पर कहा जा सकता है कि इस शोध रणनीति के जरिए विधायक के जेंडर के कारण होने वाले बुनियादी प्रभाव को अलग कर दिया गया है। दूसरे शब्दों में, हमारे परिणाम ऐसे प्रयोग से निकले हैं जिसमें पता किया गया है कि बाकी चीजें एक जैसी होने पर किसी निर्वाचन क्षेत्र में पुरुष विधायक की जगह महिला विधायक के चुने जाने पर आर्थिक विकास में कैसा परिवर्तन होगा।  

हमने 1992 से 2012 तक की अवधि के लिए 4,265 विधान सभा क्षेत्रों के आंकड़ों की जांच की है जिस दौरान अधिकांश राज्यों में चार चुनाव हुए थे।

शोध परिणाम

आर्थिक विकास

महिला विधायकों के कारण उनके विधान सभा क्षेत्रों में आर्थिक प्रदर्शन पुरुष विधायकों की अपेक्षा लगभग 1.8 प्रतिशत अंक प्रति वर्ष बढ़ जाता है। यह देखते हुए कि सेंपल पीरियड में भारत में औसत विकास दर लगभग 7 प्रतिशत थी, हमारे अनुमान बताते हैं कि महिला विधायकों के कारण उनके विधान सभा क्षेत्रों में विकास में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि हो जाती है।

हमें इस बात की भी चिंता थी कि ऐसा विकास पड़ोसी पुरुष-प्रधान विधान सभा क्षेत्रों के विकास की कीमत पर हुआ हो सकता है, जिस स्थिति में पूरी अर्थव्यवस्था में कोई बेहतरी नहीं आएगी। हालांकि इसकी जांच करने पर हमें पुरुष विधायक वाले पड़ोसी विधान सभा क्षेत्रों में विकास दर घटने का कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसलिए हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि महिला विधायक चुनने का पूरी अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान होता है।  

इस महत्वपूर्ण निष्कर्ष के पीछे मौजूद मैकेनिज्म को समझने के लिए हमने पुरुष और महिला विधायकों के बीच भ्रष्टाचार, कुशलता, और प्रेरणा के मामले में अंतर की संभावना पर विचार किया। इनमें से प्रत्येक चीज विकासशील देशों में आर्थिक विकास से साथ जुड़ी हुई है। हर मामले में हमें महिलाओं के पक्ष में साक्ष्य मिले।

भ्रष्टाचार

हमारे विश्लेषण के सैंपल में चुनाव के लिए खड़े होते समय पुरुष विधायकों पर महिला विधायकों की तुलना में तिगुने अधिक आपराधिक मामले लंबित होने की आशंका रही है। और हमने अनुमान लगाया है कि यह बात पुरुष और महिला विधायकों वाले विधान सभा क्षेत्रों के बीच विकास में एक-चौथाई अंतर होने की व्याख्या कर सकती है। फिसमैन एवं अन्य (2014) द्वारा पेश किए गए पदासीन लोगों के वास्तविक भ्रष्टाचार के अनुमान हमारे इस परिणाम का समर्थन करते हैं। हमने पाया है कि पद पर रहते हुए महिलाएं जिस दर से परिसंपत्तियां संचित करती हैं वह पुरुषों की तुलना में 10 प्रतिशत अंक प्रति वर्ष कम है। ये निष्कर्ष प्रायोगिक साक्ष्य के अनुकूल है कि महिलाएं अधिक निष्पक्ष, और जोखिम नहीं लेने वाली हैं और उनके द्वारा आपराधिक तथा अन्य जोखिम भरे व्यवहार अपनाने की आशंका पुरुषों से कम होती है (एंड्रिओनी एवं अन्य 2001, एक्केल एवं ग्रॉसमैन 2008, फ्लेशनर एवं अन्य 2010)।

इंफ्रास्ट्रक्चर

चूंकि आर्थिक अधिसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण इनपुट होती है, खास कर विकासशील देशों में (जैकोबी 2000), इसलिए हमने केंद्र द्वारा वित्तपोषित एक बड़े ग्राम सड़क निर्माण कार्यक्रम (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) के क्रियान्वयन में विधायकों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया है। हमने पाया कि पुरुष और महिला राजनेताओं में अपने विधान सभा क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय परियोजनाओं के लिए निगोशिएट करने की एक जैसी संभावना होती है। हालांकि महिलाओं में इन परियोजनाओं के पूरा होने के मामले में चौकसी रखने की अधिक संभावना होती है। महिलाओं के नेतृत्व वाले विधान सभा क्षेत्रों में अपूर्ण सड़क परियोजनाओं का हिस्सा 22 प्रतिशत अंक कम है। इसकी व्याख्या हम प्रभावकारिता के मार्कर के बतौर करते हैं। चूंकि सड़क निर्माण का अधिक लाभ पुरुषों को मिलता है (ऍशर एवं नोवोसाद 2016), इसलिए इससे यह बात भी स्थापित होती है कि आम तौर पर किए जाने वाले दावे के विपरीत, महिला राजनेता सिर्फ महिलाओं के हितों के लिए ध्यान केंद्रित नहीं करती हैं।

चुनावी अनिश्चितता

निष्कर्ष रूप में, सेंपल को ‘स्विंग’ (नज़दीकी चुनाव वाले क्षेत्र) और अन्य विधान सभा क्षेत्रों में बांटने पर हम पाते हैं कि महिला विधायक बिना स्विंग वाले विधान सभा क्षेत्रों में ही पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं। दूसरे शब्दों में, स्विंग वाले विधान सभा क्षेत्रों में, जहां चुनावों में लगातार सफलता अधिक अनिश्चित होती है (इसलिए चुनावी प्रोत्साहन अधिक तीखे होते हैं), चुने गए पुरुष आर्थिक विकास में सुधार के लिए अधिक जोर लगाते दिखते हैं। इस परिणाम का एक औचित्य यह है कि पुरुषों में राजनीतिक अवसरवादिता दिखती है जबकि महिलाओं में अधिक आंतरिक प्रेरणा दिखती है। पहले के अध्ययनों में तर्क दिया गया है कि महिलाओं में मुनाफे के बजाय मिशन वाले कार्यों को चुनने का अत्यधिक रुझान होता है, लेकिन हमें राजनीतिक क्षेत्र में ऐसा परिणाम प्राप्त होने की जानकारी नहीं है।

नीतिगत निहितार्थ

वर्ष 2010 में भारतीय संसद के उच्च सदन में सभी संसदीय और विधान सभा क्षेत्रों का एक-तिहाई हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित करने के लिए प्रस्तावित ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन पारित हुआ था। हालांकि इस विधेयक का संसद और राज्यों की विधान सभाओं के द्वारा पारित होना अभी भी ज़रूरी है। हमारे शोध परिणाम इस गतिरोध के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक हैं। विधायक का जेंडर आर्थिक प्रदर्शन के साथ किस तरह से जुड़ा हुआ है, इस सवाल पर साक्ष्यों की कमी को देखते हुए हमारे शोध परिणाम भारत के बाहर के लिए भी हितकर हैं।

हमने इस बात के भी कुछ साक्ष्य पाए हैं कि भारत के विकसित राज्यों में और सेंपल वाले उन विधान सभा क्षेत्रों में जहां विधायकों ने कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की है, प्रदर्शन में लैंगिक अंतराल कम है। दोनो स्थितियों में आपराधिक प्रवृत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में भी कम लैंगिक अन्तर है। इस तरह, भ्रष्टाचार के रुझान के मामले में लैंगिक भिन्नताएं आंतरिक होने के बावजूद अगर विकास के साथ भ्रष्टाचार के अवसरों में कमी आती है, तो कम विकसित देशों में विकास करने में महिलाएं पुरुषों से अधिक प्रभावी हो सकती हैं। दूसरी ओर, राजनीति जैसे जनोन्मुख पेशों में जिस हद तक महिलाएं अपने अंदर से अधिक प्रेरित होती हैं, वे अनेक स्थितियों में पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। 

लेखक परिचय: सोनिया भलोत्रा यूनिवर्सिटी ऑफ़ एस्सेक्स (यू.के.) में अर्थशास्त्र की प्रॉफेसर हैं। 

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