पर्यावरण

संपन्न शहरी परिवारों में जल संरक्षण को प्रेरित करना

  • Blog Post Date 14 सितंबर, 2021
  • लेख
  • Print Page
Author Image

Vivek

Independent Researcher

vivekv68@gmail.com

Author Image

Deepak Malghan

Indian Institute of Management Bangalore

dmalghan@iimb.ac.in

Author Image

Kanchan Mukherjee

Indian Institute of Management Bangalore

kanchan.mukherjee@iimb.ac.in

पानी की मांग को कम करना - विशेष रूप से संपन्न, शहरी घरों में - सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने और इसे एक किफायती मूल्य पर बनाए रखने के लिए बढ़ती आपूर्ति के बोझ को कम कर सकता है बेंगलुरू में किये गए एक क्षेत्र-प्रयोग के आधार पर यह लेख दर्शाता है कि 'आदत-परिवर्तन' के हस्तक्षेप से किसी भी आर्थिक प्रोत्साहन या प्रतिबंधों के बिना घरेलू पानी की खपत में 15-25% की कमी लाई जा सकती है और ये परिणाम हमारे अध्ययन की दो साल की अवलोकन अवधि के लिए बने रहे हैं।

व्यवहार संबंधी हस्तक्षेप, जैसे कि शराब पीकर गाड़ी न चलाने के लिए बारंबार के प्रबोधन और तंबाकू के सेवन के प्रतिकूल प्रभाव दिखाने वाले रक्तरंजित दृश्य नागरिक व्यवहार में स्थायी परिवर्तन की अपेक्षा रखने वाले नीतिगत साधन के रूप में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के कई प्रकाशनों और ब्रिटेन में बिहेवियरल इनसाइट्स टीम द्वारा अग्रणी राज्य-प्रायोजित बढ़ते थिंक-टैंक द्वारा समर्थित व्यवहार विज्ञान के अनुप्रयोग में रुचि बढ़ रही है। अधिकांश विशेषज्ञों के बीच इस विषय की संभावित नवीनता के बावजूद और इन हस्तक्षेपों (फ्रे और रोजर्स 2014, केली और बार्कर 2016) से प्रेरित प्रारंभिक लाभकारी प्रभावों की दृढ़ता में कमी के बावजूद यह एक सुस्पष्ट प्रवृत्ति है। घरों में पानी और ऊर्जा संरक्षण के बारे में दीर्घकालिक और लगातार व्यवहार परिवर्तन प्राप्त करना अनुसंधान का एक सक्रिय क्षेत्र है (उदाहरण के लिए, फील्डिंग एवं अन्य 2013, ब्रैंडन एवं अन्य 2017, एह्रेट एवं अन्य 2021)। पीएनएएस (विवेक एवं अन्य 2021) में प्रकाशित हालिया शोध में, हम आदतों में बदलाव को लक्षित करके संरक्षण व्यवहार में लगातार बदलाव लाने के लिए एक क्षेत्र-प्रयोग तैयार करते हैं।

जल संरक्षण नीति में व्यवहारिक हस्तक्षेप

वैश्विक स्तर पर ताजे पानी और बिजली की खपत का क्रमशः एक-दसवां और एक-चौथाई हिस्सा परिवारों का है (अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, 2020, संयुक्त राष्ट्र, 2019)। घरेलू स्तर पर व्यवहारिक हस्तक्षेप पानी, ऊर्जा और अन्य पर्यावरणीय संसाधनों (ऑलकॉट और मुलैनाथन 2010, कार्लसन और जोहानसन-स्टेनमैन 2012) के संरक्षण के लिए अपेक्षाकृत सस्ते नीतिगत साधन प्रदान करते हैं, हालांकि दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन को प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण रहा है (कॉस्टानजो एवं अन्य 1986)। कुछ दृढ़ मामले मुख्य रूप से सामाजिक तुलना पर आधारित होते हैं, जैसे कि एक संशोधित बिल-विवरण, जो समुदाय में पानी के औसत उपयोग सहित घरेलू उपयोग की तुलना को दर्शाता है (ऑलकॉट और रोजर्स 2014, फेरारोएंड प्राइस 2013) जिसके परिणामस्वरूप, कुछ परिवार जो पानी की औसत से अधिक खपत कर रहे थे, उनमें समग्र रूप से कमी आयी।

तथापि, तुलना का सामाजिक आधार समस्यात्मक हो सकता है क्योंकि खपत का वर्तमान स्तर शायद वांछनीय न हो (सियालडिनी 2003)। अधिकांश संपन्न समुदायों मे उपयोग का वर्तमान स्तर अरक्षणीय रूप से उच्च हो सकता है और अधिकांश उपेक्षित समुदायों में जीवन की उचित गुणवत्ता या स्वच्छता के लिए आपूर्ति या उपलब्धता का वर्तमान स्तर बहुत कम हो सकता है। तुलना का एक परोक्ष आधार- जैसे डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) द्वारा परिभाषित शहरी घरों में पानी के उपयोग का अपेक्षित स्तर (लगभग 140 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन, या एलपीसीडी) आपूर्ति की योजना और प्रशासन के लिए एक बेहतर मीट्रिक होने के साथ-साथ और अधिक सार्थक हो सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों की कमी, असमान पहुंच और आपूर्ति की उच्च पर्यावरणीय लागत संरक्षण व्यवहार की दृढ़ता में कमी को दूर करने के लिए और प्रेरणा प्रदान करती है। भारत जैसे विकासशील देशों में, खासकर शहरों में पानी की कमी विशेष रूप से अधिक है, जहां पिछले सात दशकों में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है (नारायण और पांडे 2012, शाह 2016)। पानी तक पहुंच और मूल्य-निर्धारण में सामाजिक असमानताएं जारी हैं (मैकडॉनल्ड एवं अन्य 2011, यूएन, 2019)- संपन्न समुदाय न केवल पानी के उच्च-उपयोगकर्ता होते हैं, बल्कि पानी कम कीमत पर भी प्राप्त करते हैं, जबकि गरीब समुदाय पर्याप्त पानी पाने के लिए अक्सर संघर्ष करते हैं और इसके लिए अधिक कीमत भी चुकाते हैं (व्हिटिंगटन 1992, संयुक्त राष्ट्र, 2019)। कई बड़े शहरों में तेजी से शहरीकरण और जनसंख्या में वृद्धि ने दूर-दराज की नदियों, जलाशयों और जलभृतों से पंप किए गए पानी के बढ़ते पर्यावरणीय पदचिह्न को जन्म दिया है। ग्लोबल वार्मिंग के साथ ताजे पानी की कमी और भी बदतर होने की अपेक्षा है, जिससे सतही जल स्रोतों में और क्षरण और अप्रत्याशितता हो सकती है।

जल संरक्षण संबंधी नीतिगत साधनों का उपयोग आपूर्ति (होक 2014) मिलान में मदद हेतु मांग को कम करा सकता है। व्यवहारिक हस्तक्षेप आर्थिक साधनों (मूल्य और प्रतिबंध जैसे) की तुलना में एक विशेष रूप से आकर्षक नीति विकल्प प्रदान करते हैं जो अक्सर राजनीतिक और सामाजिक रूप से कठिन विकल्प होते हैं।

पानी की बर्बादी से पानी के संरक्षण तक

हमारे प्रयोग में व्यवहारिक हस्तक्षेप में संभावित रूप से समस्याग्रस्त सामाजिक तुलना शामिल नहीं है। साथ ही, हम इन-पर्सन इंटरैक्शन से बचते हैं जिससे डेटा-गुणवत्ता संबंधी समस्याएं1 हो सकती हैं। हमने कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु में एक संपन्न आवासीय समुदाय में अध्ययन किया, जिसने पानी के मीटर तो लगाए थे, लेकिन पानी के उपयोग2 के आधार पर घरों को बिल जारी करना शुरू नहीं किया था। इससे पूर्व के सभी ज्ञात अध्ययनों में निहित डेटा की गुणवत्ता के मुद्दे से बचना संभव हो सका- मूल्य संकेत का होना एक प्रकार से उपयोग को कम करने के लिए एक अंतर्निहित प्रोत्साहन था।

हमारे हस्तक्षेप का आधार सैद्धांतिक रूप से आधारित आदत-परिवर्तन का एक ढांचा है जो मानव मन के काम करने के तरीके और विशेष रूप से उसकी 'तेज और धीमी' सोच और आदतों के तरीकों के सम्बन्ध में प्रासंगिक ज्ञान को एकीकृत करता है (इवांस और स्टैनोविच 2013, कन्नमैन 2011, मुखर्जी 2010, जैगर 2003, वुड और रनर 2016)। आदतें सीखे हुए व्यवहार के पैटर्न हैं जिन्हें हम बिना किसी सचेत विचार या ध्यान के आचरित करते हैं। जब हम दैनिक आधार पर नियमित कार्य करते हैं, जैसे कि स्नान करना या बर्तन धोना, तो हम अपनी आदतों से प्रेरित होते हैं। बुरी आदतों (यहाँ, पानी की बर्बादी करना) को बदलने के लिए, पुरानी आदतों को भूलने और बेहतर आदतें (यानी जल संरक्षण करना) अपनाने के लिए समय-समय पर दोहराए गए सोचपूर्ण विचार और प्रयास की आवश्यकता होती है।

हम लक्ष्य-निष्पादन के सुस्थापित सिद्धांत (लोके और लैथम 2006) को हस्तक्षेप के एक तंत्र के रूप में अपनाते हैं- लक्ष्य तब क्रियाओं में तब्दील हो जाते हैं जब लक्ष्य विशिष्ट, व्यवहार्य होते हुए भी कठिन होते हैं, और व्यक्ति के पास अपने लक्ष्य की ओर कार्य करने के लिए प्रेरणा और कौशल होता है । हमारा हस्तक्षेप, एक साप्ताहिक जल-उपयोग रिपोर्ट के साथ घर में पानी के उपयोग की सरल जानकारी प्रदान करता है (चित्र 1 में रिपोर्ट का भाग ए), निष्पादन पर प्रतिक्रिया के साथ पानी के उपयोग संबंधी लक्ष्य का सुझाव देता है (चित्र 1 में भाग बी) और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए युक्तियाँ (चित्र 1 में भाग सी) भी प्रदान करता है। चित्र 1 में दिखाए गए ये तीन भाग घरों में पानी के उपयोग से संबंधित आदतों को बदलने में मदद करते हैं। हमारे आदत-परिवर्तन ढांचे के आधार पर यह हस्तक्षेप घर में पानी के उपयोग के बारे में घरेलू-विशिष्ट प्रतिक्रिया के माध्यम से पानी के उपयोग को सीमित करने के बारे में विचारों को प्रेरित कर सकता है। इसके अलावा, आसान उपायों के रूप में सुझाव देकर पानी के उपयोग को कम करने और पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार की दिशा में विशिष्ट संरक्षण कार्यों को लागू करना संभव है। हम चित्र 1 में दिखाई गई इस मुद्रित एक-पृष्ठ रिपोर्ट को केवल पाँच सप्ताह के लिए भेजते हैं जिसमें प्रत्येक सप्ताह घर में रसोई और शॉवर में पानी का उपयोग कम करने जैसी नई युक्तियों-सहित पानी के उपयोग को कम करने में स्थानीय रूप से प्रासंगिक चुनौतियों को शामिल किया जाता है।

चित्र 1. नमूना हस्तक्षेप रिपोर्ट

हस्तक्षेप शुरू होने से पहले हम यादृच्छिक रूप से परिवारों को चार समूहों में विभाजित करते हैं - एक 'नियंत्रण' समूह जिसे रिपोर्टें प्राप्त नहीं होती और तीन 'उपचार' समूह जो एक (समूह टी 1 के लिए भाग ए), दो (समूह टी 2 के लिए भाग ए और बी) या साप्ताहिक रिपोर्ट के सभी तीन भाग (समूह टी 3) प्राप्त करते हैं। इस डिज़ाइन के द्वारा हम समय के साथ नियंत्रण और उपचारित समूहों में पानी के उपयोग की तुलना कर पाते हैं। हमारे प्रयोग को चार चरणों में विभाजित किया गया है: प्रयोग शुरू करने के पहले का बेसलाइन के रूप में अवलोकन या 'प्रारंभिक' चरण, इसके बाद का पांच सप्ताह का हस्तक्षेप के दौरान का चरण, और एक वर्ष से अधिक का कूलिंग-ऑफ चरण जब कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। अंतिम चरण, 'कीमत', कूलिंग-ऑफ अवधि के बाद घरेलू स्तर पर उपयोग किए जाने वाले पानी की मात्रा के आधार पर पानी के त्रैमासिक बिल की शुरूआत को संदर्भित करता है। समूह द्वारा पानी के उपयोग की प्रवृत्ति रेखा (चित्र 2) इस बात का ठोस समर्थन दिखाती है कि हमारा हस्तक्षेप पानी के उपयोग को कम करने में सक्षम है।

चित्र 2. पानी का उपयोग, घरेलू समूहों और क्षेत्र प्रयोग के चरण के जरिये सारांशित

जैसा कि अपेक्षित था, हम पाते हैं कि3, टी 3- जो रिपोर्ट के सभी तीन भागों को प्राप्त करता है, पानी के उपयोग में सबसे अधिक कमी करता है। ये बड़े प्रभाव सम्पूर्ण दो साल की अवलोकन अवधि में भी बने रहते हैं। टी 3 परिवार हस्तक्षेप के चरण के दौरान पानी के उपयोग को काफी कम कर देते हैं और बाद के चरणों में इसे और कम कर देते हैं। टी 2 समूह का टी 3 की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा और कम स्थायी प्रभाव है। टी 1 में पानी के उपयोग में कमी महत्वपूर्ण नहीं है। नियंत्रण और टी 3 समूह के बीच पानी के उपयोग में अंतर उसकी कीमत के लागू करने से नहीं है, जैसा कि चित्र 2 में समानांतर नीली और पीली रेखाओं में देखा गया है, जो टी 3 द्वारा पानी के उपयोग में और कमी को दर्शाता है।

नीति निहितार्थ

जल आपूर्ति बढ़ाना भारत और दक्षिण विश्व (ग्लोबल साउथ) के अधिकांश हिस्सों में जल प्रबंधन नीति का मुख्य जोर रहा है, और सुरक्षित और किफायती पेयजल तक सार्वभौमिक पहुंच के संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। पानी की मांग को कम करने से इसकी आपूर्ति बढ़ाने और इसे किफायती कीमत पर बनाए रखने का बोझ सीधे तौर पर हल्का हो सकता है। बढ़ती संपत्ति, बढ़ती आय असमानता, और कई शहरी इलाकों में प्रचुर मात्रा में 24x7 पानी की आपूर्ति के साथ ही उनके आसपास पानी की कमी बनी हुई है और घरेलू पानी का उपयोग असमान बना हुआ है।

हमारा अध्ययन एक अपेक्षाकृत सस्ते उपकरण के रूप में व्यवहारिक हस्तक्षेप की क्षमता को दर्शाता है जो उच्च खपत वाले घरों से पानी की आपूर्ति के एक बड़े हिस्से को मुक्त कर सकता है। पानी के उपयोग के उचित स्तर की ओर यह परिवर्तन अन्य नीति विकल्पों से जुड़ी सामाजिक और राजनीतिक बाधाओं के बिना है - जैसे कि उच्च-पर्याप्त मूल्य-बिंदु पर पानी के लिए बिलिंग, या प्रतिबंध लागू करने में व्यावहारिक बाधाएं। हमारे परिणाम पानी के संरक्षण के लिए प्रोत्साहन के रूप में उसकी कीमत के साथ और बिना दोनों में व्यवहारिक हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का समर्थन करते हैं।

हमारा हस्तक्षेप मानव सोच के दोहरे प्रक्रिया मॉडल की स्पष्ट समझ के माध्यम से उच्च उपयोग में अंतर्निहित व्यवहार संबंधी बाधाओं से सीधे संबंधित है। एक अवचेतन संदेश के या उपभोक्ता को शामिल किये बगैर संरचना में परिवर्तन के बजाय यह हस्तक्षेप सीधे व्यक्तियों के साथ उनके वर्तमान स्तर के उपयोग की जांच करने और जल संरक्षण प्रथाओं के साथ उनकी आदतों और संरचनाओं का आकलन करने में मदद करता है। यह दृष्टिकोण हर बूंद को बचाने के लिए उपदेश जैसे अन्य लोकप्रिय हस्तक्षेपों के बिल्कुल विपरीत है जो यह परिभाषित नहीं करते कि उपयोग का सही स्तर क्या है या वहां आसानी से कैसे पहुंचा जाए।

हमारा हस्तक्षेप स्थायी परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए आदतों में बदलाव पर केंद्रित है। जल संरक्षण को अधिकतम तब किया जाता है जब कटौती और दक्षता का संयोजन होता है, जैसा कि हमारे हस्तक्षेप के टिप्स अनुभाग में है, जिससे पानी के संरक्षण पर गुणक प्रभाव पड़ता है (इन्स्किप और अट्टारी 2014)। केवल दक्षता पर ध्यान केंद्रित करने से रिबाउंड प्रभाव का खतरा होता है, जिसमें उपयोग में वृद्धि के कारण दक्षता लाभ खो जाता है, जैसा कि प्रकाश क्षेत्र में देखा गया है जहां दक्षता में नवाचारों के बावजूद क्षेत्र-प्रकाश का उपयोग बढ़ता रहा है (हेरिंग और रॉय 2007)।

हमारा अध्ययन घरेलू जल संरक्षण प्रथाओं (बेंजोनी और टेलेंको 2016, एह्रेट एवं अन्य 2020) और हस्तक्षेपों में नैतिक प्रभाव के उपयोग (सियालडिनी 2003, 2009) के माध्यम से जल संरक्षण के संबंध में व्यवहार विज्ञान के साहित्य पर आधारित है। हमारे हस्तक्षेपों का सैद्धांतिक रूप से ठोस आधार हमें अंतर्निहित सिद्धांतों का अध्ययन करना और समझना संभव बनाता है और इस संदर्भ के आधार पर डिजाइन में उपयुक्त समायोजन के साथ पानी की मांग को कम करने के लिए विविध सेटिंग्स में हमारे दृष्टिकोण को लागू करता है। यह देखते हुए कि व्यवहारिक हस्तक्षेप व्यवहार में अपेक्षाकृत नए हैं और उनमें क्षमता है, ऐसे हस्तक्षेपों को डिजाइन कर उनका कार्यान्वयन करने के लिए तेजी से क्षमता का निर्माण करना आवश्यक है। अच्छी तरह से डिज़ाइन किए गए प्रयोगों द्वारा बड़ी संख्या में समुदाय के लिए या यहां तक ​​कि शहर-स्तर के रोलआउट हेतु इस तरह के हस्तक्षेपों को सीखना, ठीक करना और स्केल-अप करना संभव हो सकेगा।

क्या आपको हमारे पोस्ट पसंद आते हैं? नए पोस्टों की सूचना तुरंत प्राप्त करने के लिए हमारे टेलीग्राम (@I4I_Hindi) चैनल से जुड़ें। इसके अलावा हमारे मासिक समाचार पत्र की सदस्यता प्राप्त करने के लिए दायीं ओर दिए गए फॉर्म को भरें।

टिप्पणियाँ:

  1. प्रयोग को इन-पर्सन इंटरैक्शन को बाहर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है; एक व्यक्ति (जैसे शोधकर्ता या मीटर रीडर) प्रतिभागियों पर अव्यवस्थित प्रभाव का स्रोत हो सकता है। इस शोध की प्रतिकृति के लिए और बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए लागत कम रखने के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। हस्तक्षेप एक-पृष्ठ की मुद्रित रिपोर्ट के माध्यम से किया जाता है।
  2. शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक समृद्ध अपार्टमेंट परिसर के निवासियों ने हमारे क्षेत्र-प्रयोग के एक स्थल के रूप में कार्य किया। हमने दो साल से अधिक की अवधि के दौरान 120 आवासीय इकाइयों में से प्रत्येक आवास इकाइ के लिए तीन पानी के मीटर और एक बिजली मीटर की दैनिक रीडिंग एकत्र की। इससे 4 मीटर में से प्रत्येक के लिए लगभग 88,560 अवलोकनों का अंतिम डेटासेट प्राप्त हुआ । हमने 4 वर्षों से अधिक समय तक पानी के उपयोग का मासिक माप भी वहां के सामुदायिक कार्यालय से लिया ।
  3. हमने एक सरल-लेकिन-शक्तिशाली अंतर-अंतर-प्रतिगमन का उपयोग करके समूह और चरण स्तर के प्रभाव आकारों का अनुमान लगाया, जो हस्तक्षेप तक पहुंच प्राप्त करने वाले और नहीं करने वाले समान समूहों में समय के साथ परिणामों के विकास की तुलना करने के लिए एक तकनीक है।

लेखक परिचय: विवेक स्वतंत्र शोधकर्ता हैं। दीपक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलौर में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। कंचन मुखर्जी भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलौर में संगठनात्मक व्यवहार और मानव संसाधन प्रबंधन के प्रोफेसर हैं।

No comments yet
Join the conversation
Captcha Captcha Reload

Comments will be held for moderation. Your contact information will not be made public.

संबंधित विषयवस्तु

समाचार पत्र के लिये पंजीकरण करें