सामाजिक पहचान

क्या किसी सहकर्मी का पुरुष या महिला होना मायने रखता है? कॉल सेंटरों से प्राप्‍त साक्ष्य

  • Blog Post Date 08 दिसंबर, 2020
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Deepshikha Batheja

Centre for Disease Dynamics, Economics and Policy

deepshikha@cddep.org

कई सिद्धांत यह सुझाव देते हैं कि लिंग-विभेदी समाजों में महिला एवं पुरुष कर्मचारियों के एक साथ काम करने के नकारात्मक परिणाम हो सकते है। पांच भारतीय शहरों में स्थित कॉल सेंटरों में 765 कर्मचारियों के साथ किए गए प्रयोग के आधार पर यह लेख दर्शाता है कि यदि किसी कर्मचारी को ऐसी टीम में रखा जा रहा है जिसमें पुरुष व महिला दोनों हों, इसके विपरीत यदि उसे ऐसी टीम में रखा जा रहा है जिसमें केवल पुरुष या केवल महिला कर्मचारी हों तो इसका कर्मचारी की उत्पादकता या उसके काम पर मौजूद होने के दिनों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 

कार्यस्थल में पुरुष व महिला कर्मचारियों के एक साथ कार्य करने से उनकी उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है (एकरलॉफ एवं क्रेन्‍टन 2000, बरट्रैंड एवं अन्‍य 2005)। यह कर्मचारी की उत्पादकता को कम कर सकता है यदि पुरुष व महिला कर्मचारी (1) एक दूसरे की उपस्थिति से असहज या विचलित होते हैं (कंडेल एवं लेजि़यर 1992), (2) आपस में बातचीत करते समय संवाद संबंधी बाधाओं का सामना करते हैं (हैमिल्टन एवं अन्‍य 2012), (3) नए लोगों से मिलने के विकल्‍पों की कमी के कारण संगठन में आपस में अधिक घुलने-मिलने लगते हैं। दूसरी ओर, यह आपस में सीखने और ज्ञान बांटने का कारण भी बन सकता है (हैमिल्टन एवं अन्‍य 2012)।

क्या किसी सहकर्मी का पुरुष या महिला होना मायने रखता है? यह प्रश्न विशेष रूप से एक पारंपरिक देश के विन्‍यास में अधिक प्रासंगिक है, जहां लैंगिक भूमिका अधिक कठोर है। अक्सर ऐसे पारंपरिक विन्‍यास में विपरीत लिंग के ऐसे सदस्यों के साथ लंबे समय तक आपसी बातचीत कार्यस्थल पर ही होती है, जो बराबरी के हों किन्तु परिवार के बाहर हों। मैं पांच भारतीय शहरों (चार छोटे शहरों और एक महानगरीय शहर) में स्थित कॉल सेंटरों में एक प्रयोग करती हूं (बठेजा 2020)।1 पिछली उत्पादकता पर मिलान जोड़ी यादृच्छिकता2 का उपयोग करके मैं कॉल सेंटर के कर्मचारियों या ग्राहक बिक्री प्रतिनिधियों को पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीम (30-50% महिलाएं) और समान लिंग वाले कर्मचारियों की टीमों के रूप में यादृच्छिक करती हूं। कुल 765 कर्मचारियों (पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में 297 पुरुष कर्मचारी, सभी पुरुषों वाली टीमों में 320 कर्मचारी, पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में 67 महिला कर्मचारी और सभी-महिला वाली टीमों में 81 कर्मचारी) को औसतन 12 सप्ताह के लिए अपनी नई टीमों के साथ बिठाया।3 पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में पुरुष और महिला सहकर्मियों को एकांतर सीट पर बैठाया ताकि वे विपरीत लिंग के कर्मचारी के साथ घनिष्‍ठतापूर्वक आपसी संवाद कर सकें। 

कर्मचारी के कार्य-निष्‍पादन पर टीम के सदस्यों के पुरुष या महिला होने के प्रभाव के बारे में इस प्रयोग को करने के लिए कॉल सेंटर चुनने के कई फायदे हैं। सबसे पहले - पुरुष-वर्चस्व होने के बावजूद कॉल सेंटर या बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) क्षेत्र में एजेंट स्तर पर बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों (ग्राहक-प्रतिनिधि के रूप में कॉल करने से जुड़े कार्य) को नियोजित किया जाता है क्‍योंकि उनका अंतर्वैयक्तिक कौशल तुलनात्मक रूप से अधिक होता है (जेन्सेन 2012)। इस विन्‍यास को चुनने का दूसरा कारण यह है कि ये प्रवेश स्‍तरीय कार्य हैं और इसमें युवाओं को नियोजित किया जाता है जिनका विपरीत लिंग वाले व्‍यक्तियों से कम संपर्क हुआ होता है। मेरे प्रतिदर्श में एक एजेंट की औसत आयु लगभग 21 वर्ष है। एक तीसरा कारण यह है कि इस विन्‍यास में सभी कर्मचारियों के लिए उत्पादकता के समान और सुसंगत उपाय होते हैं, जैसा कि कुछ अन्य कार्य विन्‍यासों में नहीं हो सकता है।

मेरे पास व्यक्तिगत उत्पादकता के विस्तृत और पूर्ण दैनिक स्तरीय माप हैं, जो कॉल सेंटरों में प्रौद्योगिकी-आधारित स्वचालित डेटा संग्रह का उपयोग करके आंतरिक रूप से एकत्र किया जाता है। कॉल सेंटर के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ चर्चा और सहमति के बाद व्यवसायों/प्रक्रियाओं की प्रकृति के आधार पर शीर्ष तीन उत्पादकता संकेतक चुने जाते हैं। इनमें औसत कॉल हैंडलिंग समय, उत्तर दिए गए कॉलोंकी संख्या, की गई बिक्रीआदि शामिल हैं। इन तीन उत्पादकता संकेतकों को जोड़ने के बाद, प्रत्येक प्रक्रिया के भीतर कुल उत्पादकता को “मानकीकृत”4 किया जाता है। यह उत्पादकता सूचक को सभी प्रक्रियाओं में तुलनीय बनाता है। व्यापक सीमा पर मैं अध्ययन अवधि के दौरान अध्ययन में उपस्थित होने के दिन से काम किए गए दिनों की हिस्सेदारी को देखती हूं। यह एक अप्रतिबंधित माप है जो काम के प्रदर्शन के आधार पर होता है, इसलिए चयन संबंधी कोई चिंता नहीं होती है।

क्या कॉल सेंटरों में टीम मायने रखती है?

कॉल सेंटरों में टीम एक महत्वपूर्ण इकाई है। एक सामान्‍य कॉल सेंटर में ग्राहक सहायता कर्मचारी या एजेंटों से मिल कर टीमें बनती हैं और एजेंट अपनी टीम के सदस्यों के साथ टीम की बैठकों में प्रतिदिन बातचीत करते हैं। जैसा कि कॉल सेंटर में यह एक मानक प्रक्रिया है कि टीमें एक साथ बैठती हैं। टीमों की लिंग आधारित संरचना को बदलने से एक कर्मचारी के आसपास बैठे साथियों के पुरुष या महिला होने में बदलाव हो जाता है। अगर कर्मचारी किसी कॉल पर फंस जाते हैं और उनका टीम लीडर या मैनेजर उनके आस-पास नहीं होता है तो वे अपने बगल में बैठे एजेंटों से बात करते हैं। आधार सर्वेक्षण में लगभग 66% उत्तरदाताओं का मानना ​​है कि उन्होंने अपने बगल में बैठे एजेंटों से कुछ न कुछ अवश्‍य सीखा। यह पूछे जाने पर कि कॉल पर अटकते समय वे किसकी मदद लेते हैं, तो अधिकांश एजेंटों ने जवाब दिया कि उन्होंने टीम लीडर (67%) की मदद ली। उसके बाद पास में बैठे एजेंटों (27%) और फिर अन्य (6%) का क्रम आता है। इस विन्‍यास में सहकर्मी प्रभाव का महत्व अर्थशास्त्र साहित्य के इस साक्ष्य द्वारा समर्थित है कि उच्च-कुशल नौकरियों की तुलना में कम-कुशल या नियमित कार्यों पर महत्वपूर्ण और बड़ा सहकर्मी प्रभाव पड़ता है (कॉर्नेलिसन एवं अन्‍य 2017, इचिनो एवं फॉक 2005, बंडियरा एवं अन्‍य 2010)।

मुख्य निष्‍कर्ष: सभी पुरुषों वाले कार्यस्थलों पर महिलाओं को शामिल करना कंपनियों के लिए महंगा नहीं है 

क्या महिला सहकर्मी होने से पुरुषों की उत्पादकता कम हो जाती है?

अध्ययन अवधि के दौरान पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में पुरुष कर्मचारियों को रखे जाने पर न तो उत्‍पादकता और न ही काम पर उपस्थित होने वाले दिनों की हिस्सेदारी पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सामान्य तौर पर ऐसे साक्ष्‍य हैं कि भारत में नौकरियों पर रखे जाने में महिला-पुरुष में भेदभाव किया जाता है, जो महिलाओं की कम श्रम-शक्ति भागीदारी दर का एक संभावित कारण है (चौधरी एवं अन्‍य 2018) । इसके अतिरिक्त, दूरसंचार और बैंकिंग जैसे सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में पुरुषों का वर्चस्व है। इनमें से अधिकांश फर्मों ने स्थिति को सुधारने के लिए काम पर रखने संबंधी कोई पहल नहीं की है (भारत कौशल रिपोर्ट, 2017)। ये पुरुष-प्रधान क्षेत्र महिलाओं को काम पर रखने के बारे में संशयी हो सकते हैं और वरिष्ठ प्रबंधन में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व होने के कारण इन कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए प्रवेश बाधाओं में और वृद्धि हो सकती है (गोल्डिन 2014, चौधरी एवं अन्‍य 2018)। यह देखते हुए कि ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं जो फर्म पर बिना किसी अतिरिक्त लागत के महिलाओं को कार्यस्थल में शामिल करने के लिए सहायक साक्ष्‍य प्रदान करते हैं, मैं उत्पादकता पर सटीक रूप से शून्य प्रभाव पाती हूं।

क्या ये परिणाम सभी प्रकार के पुरुष कर्मचारियों के लिए समान हैं?

मुझे लगता है कि पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में पुरुषों को रखे जाने पर लिंग के आधार पर भेदभाव पूर्ण दृष्टिकोण वाले पुरुषों की तुलना में प्रगतिशील अभिवृत्ति वाले पुरुष कर्मचारियों में काफी अधिक उत्पादकता होती है। यह निष्‍कर्ष सामाजिक पहचान और अभिवृत्ति आधारित कर्मचारी भेदभाव संबंधी सिद्धांतों के अनुरूप है।

क्या विपरीत लिंग वाले साथियों के साथ आपस में ज्ञान साझा करना और सीखना देखा गया? पुरुष कर्मचारियों के लिए ज्ञान साझा करने में 0.3 मानक विचलन की वृद्धि हुई है, जो एक सर्वेक्षण प्रतिक्रिया है कि कर्मचारी को काम से संबंधित मुद्दों पर आस-पास बैठे एजेंटों से लाभ मिलता है। मुझे महिलाओं के लिए ज्ञान साझा करने संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिला है। यह इसलिए हो सकता है, क्योंकि औसतन, आधाररेखा पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक उत्पादक थीं।

इन युवा कर्मचारियों के बीच डेटिंग के बारे में क्या?

अंतिम पंक्ति में सभी पुरुष कर्मचारियों वाली टीमों की तुलना में पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में रखे गए पुरुष कर्मचारियों द्वारा डेटिंग किए जाने में 19 प्रतिशत अंक अधिक होने की सूचना मिलती है। सभी पुरुष कर्मचारियों वाली टीमों में रखे गए पुरुष कर्मचारियों में से लगभग 54% डेटिंग करते हैं, लेकिन अंतत: विवाह नहीं करते हैं। इसलिए नियंत्रण टीमों की तुलना में पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में रखे गए पुरुष कर्मचारियों के लिए डेटिंग में 35% की वृद्धि हुई थी। भारत में 90% से अधिक विवाहों में परिवार के बुजुर्ग निर्णय लेते हैं, और इनमें से अधिकांश अंत:जातीय होती हैं (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी, 2018)। इसलिए भारत के छोटे शहरों में पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में रखे गए पुरुष कर्मचारियों के लिए डेटिंग में वृद्धि एक महत्वपूर्ण निष्‍कर्ष है। दिलचस्प है कि पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में पुरुष कर्मचारियों में डेटिंग पर परिणाम अपेक्षाकृत प्रगतिशील पुरुषों द्वारा संचालित होता है। 

क्या कार्यस्थल पर महिला व पुरुष कर्मचारियों को एक साथ रखा जाना महिला कर्मचारियों के लिए उपयोगी था?

यहाँ भी मैं पाती हूं कि पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में रखे जाने पर महिला कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवधि के दौरान उत्पादकता या काम पर उपस्थित होने वाले दिनों की हिस्सेदारी पर कोई समग्र प्रभाव नहीं है। हालांकि ये कम सटीक अनुमानित परिणाम हैं, क्योंकि पुरुष-प्रधान कार्यस्‍थल होने के कारण प्रतिदर्श में कम महिलाएं हैं। अगली चिंता यह थी कि क्या ये महिलाएँ इन पुरुष प्रधान कार्यस्थलों पर काम करने में सहज महसूस करती हैं। महिला कर्मचारियों के लिए, पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों में सहकर्मी निगरानी और सहजता में वृद्धि देखी गई है। मिश्रित टीमों में महिला श्रमिकों को सभी महिला कर्मचारियों वाली टीमों के सापेक्ष 0.2 मानक विचलन अधिक सहकर्मी निगरानी और सहयोग प्राप्त हुआ।

नीति और शोध के लिए निहितार्थ

ये निष्कर्ष शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये अभिवृत्ति-आधारित कर्मचारी भेदभाव के कम अध्ययन किए गए विषय में साक्ष्‍य प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त उत्पादकता सुधार पर शोध इस उच्च वृद्धि वाले तथा निजी क्षेत्र में सर्वाधिक नौकरियां देने वाले क्षेत्र में कई युवा कर्मचारियों विशेषकर महिलाओं के लिए सतत नौकरी सृजन हेतु अत्‍यंत महत्वपूर्ण है। भारत में नीति निर्माता इन कॉल सेंटरों को छोटे शहरों और गांवों तक आगे बढ़ाने में रुचि रखते हैं और फर्मों को महिलाओं को नियुक्त करने हेतु विशेष प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं। कुछ कॉल सेंटर महिला कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए केंद्र सरकार (भारत बीपीओ प्रमोशन स्कीम (आईबीपीएस) से सब्सिडी प्राप्त करते हैं, जो अध्ययन का एक हिस्सा हैं। इसके निष्कर्ष यह दिखाते हुए कि कार्यस्थल पर महिलाओं को जोड़ने के कारण उत्पादकता में समग्र नुकसान नहीं होता है, यह सहायक साक्ष्य प्रदान करते हैं किदेश में महिला श्रम आपूर्ति और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माताओं के उद्देश्य को न केवल मजबूत करने हेतु हैं, बल्कि अगर पुरुष कर्मचारियों में लैंगिक आधार पर प्रगतिशील दृष्टिकोण हो तो यह वास्तव में उत्पादकता में वृद्धि का कारण बन सकता है।

इस आलेख का मूल संस्करण अंग्रेज़ी में आईजीसी ब्लॉग की सहभागीता के साथ प्रकाशित हुआ था।

टिप्पणियाँ:

  1. फील्ड प्रयोग दो भारतीय कॉल सेंटर कंपनियों में हुआ: कॉल-2-कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, और फाइव स्प्लैश इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड। कॉल-2-कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बिहार (पटना), उत्तर प्रदेश (नोएडा), और महाराष्ट्र (मुंबई) राज्यों में केंद्र हैं। फाइव स्प्लैश इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के राजस्थान (उदयपुर) और कर्नाटक (हुबली) राज्यों में केंद्र हैं। ये सभी पाँच शहर/स्थान अध्ययन का एक हिस्सा हैं। चुने गए स्थानों में से, मुंबई सबसे विकसित है और इसे एक महानगरीय और टीयर-1 शहर के रूप में वर्गीकृत किया गया है। हुबली, नोएडा और पटना कम शहरीकृत हैं और टियर-2 श्रेणी में हैं। उदयपुर टियर-3 श्रेणी में है। इस अध्ययन में कॉल सेंटर घरेलू ग्राहकों की सेवा करते हैं, इसलिए कर्मचारियों को स्थानीय भाषा में बात करनी होती है।
  2. मिलान जोड़ी यादृच्छिकरण विधि में दो इकाइयों को महत्वपूर्ण विशेषताओं की सूची पर मिलान किया जाता है और फिर उनमें से एक को बेतरतीब ढंग से ‘उपचार’ (हस्तक्षेप के अधीन) और दूसरे को‘नियंत्रण’ (हस्तक्षेप के अधीन नहीं) के रूप में निर्धारित किया जाता है। इस अध्ययन में मैं कर्मचारी के लिंग और पिछली उत्पादकता (पूर्व-अध्ययन प्रशासनिक डेटा के 3-4 सप्ताह का उपयोग करके) के आधार पर कर्मचारियों का मिलान करती हूं और फिर यादृच्छिक रूप से उनमें से एक को पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीम में और दूसरे को नियंत्रण में स्‍थापित करती हूं।
  3. उन केंद्रों में जहां 25-30% कर्मचारी महिलाएं थीं, केवल पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमऔर सभी पुरुष कर्मचारियों वाली टीमों का गठन किया गया था। जो महिलाएं पुरुष व महिला कर्मचारियों की मिश्रित टीमों का हिस्सा थीं, उनके पास सभी महिला कर्मचारियों वाली टीमों का प्रासंगिक नियंत्रण समूह नहीं था। इसलिए इन महिलाओं को अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है। जिन केंद्रों में महिला कर्मचारियों की संख्‍या45% है, वहां मिश्रित टीमों, सभी पुरुष कर्मचारियों और सभी महिला कर्मचारियों तीनों टीमों का गठन किया जा सकता है। इन मामलों में पुरुष और महिला दोनों कर्मचारी अध्ययन का एक हिस्सा थे। प्रतिदर्श में महिला कर्मचारियों के कम अनुपात के कारण अध्ययन में पुरुष कर्मचारियों की संख्या अधिक है (भले ही यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सामान्य रूप से अधिक महिलाओं को काम पर रखा जाता है, जैसा कि ऊपर बताया गया है)। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में महिला श्रम शक्ति की भागीदारी दर कम है। इसलिए कार्यस्थल पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कम है।
  4. चूंकि मैं उत्पादकता के परिणाम के लिए तीन शीर्ष चर सूचकांक का उपयोग करती हूं जो मानकीकरण एक विधि है और जिसका उपयोग मैं उत्पादकता चर को उसी पैमाने पर लाने के लिए करती हूं। यह उत्पादकता सूचकांक को केंद्रों में तुलनीय बनाता है और नियंत्रण समूह के औसत से विचलन के रूप में आसानी से व्याख्या योग्य है।
  5. काम किए गए दिनों की हिस्सेदारी अध्ययन के दिनों की कुल संख्या में से अध्ययन की अवधि (कर्मचारी की नौकरी शुरू होने की तारीख से) में काम किए गए दिनों का अनुपात है। यह उपस्थिति का एक माप  है, जिसमें कार्य की स्थिति पर ध्‍यान नहीं दिया जाता। इसलिए इसे उपस्थिति का अप्रतिबंधित माप कहा जाता है (इसमें अवधारण का माप भी शामिल है)। अगर हमें कर्मचारी की अध्‍ययन-आरंभ तिथि या कार्य-आरंभ तिथि से काम के अंतिम दिन तक की उपस्थिति का अध्‍ययन करना हो उपस्थिति का ऐसा प्रतिबंधित माप क्षयण का कारण बताने में विफल हो जाएगा। इसलिए यदि उपचार या नियंत्रण समूह में बड़ी संख्या में कर्मचारी नाखुश होने के बावजूद काम करते हैं। लेकिन फिर अचानक छोड़ देते हैं तो चयन संबंधी चिंताएँ/पूर्वाग्रह उत्पन्न हो सकते हैं। प्रतिबंधित माप इस प्रभाव को पकड़ने में सक्षम नहीं होगा, लेकिन उपस्थिति और क्षयण दोनों को मिलाते हुए अप्रतिबंधित माप इसे सफलतापूर्वक पकड़ने में सक्षम होगा।
  6. इन कॉल सेंटरों में टीमों के गठन का कोई निश्चित तरीका नहीं था। लेकिन टीमों में फेरबदल और उन्‍हें दुबारा बनाया जाना आम बात थी। कई केंद्रों में, बैठने के निश्चित स्‍थान निर्धारित नहीं किए गए थे। इसलिएस कर्मचारियों को हर सुबह काम करने के लिए खाली सीटों की तलाश करनी थी।
  7. अध्ययन में पुरुषों की लैंगिक अभिवृत्ति का आकलन करने हेतु, महिलाओं के सशक्तीकरण और लिंग व्यवहार के मापन के वर्तमान साहित्य आधार पर उनके लिए प्रश्नों का एक व्यापक सेट प्रस्तुत किया गया था(धर एवं अन्‍य 2018, ग्लेनस्टर एवं अन्‍य 2018)। शिक्षा, रोजगार, प्रजनन क्षमता और पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं के संबंध में सवाल व्यापक रूप से लैंगिक दृष्टिकोण से संबंधित हैं। उदाहरण के लिए: "क्या पत्नी को अपने पति से कम शिक्षित होना चाहिए?"
  8. मानक विचलन एक माप है जिसका उपयोग उस सेट के औसत मान (औसत) से मूल्यों के एक सेट की भिन्नता या फैलाव की मात्रा को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

लेखक परिचय: दीपशिखा बठेजा सेंटर फॉर डिसीज़ डाइनामिक्स, इक्नोमिक्स ऐंड पॉलिसी (सीडीडीईपी) में एक पोस्ट-डॉक्टोरल फैलो हैं।

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